September 09, 2020

प्रेरक

कितनी आदतें? कितने उपाय?                                                         

-निशांत मिश्रा
इंटरनेट पर व्यक्तित्व विकास के ऊपर बहुत उपयोगी लेखों की भरमार सी हो ग है। यह स्वाभाविक है कि हर व्यक्ति अपने जीवन के किसी-न-किसी पक्ष में हमेशा ही कुछ सुधार लाना चाहता है;  इसलिए यहाँ ऐसे बहुत से लोग हैं जो इसकी उपयोगिता को समझते हैं और दूसरों को जाग्रत करने के लिए इसके बारे में बहुत कुछ लिखते भी हैं। जो कोई भी इसपर कुछ लिखता है, उसका अपना कुछ अनुभव और रणनीतियाँ होती हैं;  इसलिए मैं यह मानता हूँ कि उसकी सलाह में कुछ वज़न होना चाहिए। किसी दूसरे के अनुभव से कुछ सीखने में कोई बुराई नहीं है;  क्योंकि यह ज़रूरी तो नहीं कि हम सदैव स्वयं ही गलतियाँ करके सीखते रहें!
तो यह अच्छी बात है कि बहुत से लोग जीवन और कामकाज को बेहतर बनाने के लिए अपने विचार और अनुभव हमसे बाँटते हैं। मैं तो यही मानकर चलता हूँ कि ये व्यक्ति जेनुइन हैं और इन विषयों पर जितना पढ़ा-लिखा जाए,  उतना ही अच्छा होगा। सफलता का कोई एक मार्ग नहीं है,  जिसपर चलकर आप निश्चित रूप से इसे पा सकें। हर व्यक्ति अपनी बनाई राह पर चलकर ही सफल होता है या स्वयं में उल्लेखनीय परिवर्तन कर पाता है यह बात और है कि आप दूसरों द्वारा बनाई पगडंडियों का सहारा लेकर आगे बढ़ने का हौसला जुटाते हैं।
इतना सब होने के बाद भी यहाँ ऐसा कुछ है कि बहुत सारे लोग (मैं भी) व्यक्तित्व विकास के भँवर में कूदकर फँस जाते हैं। ज्यादातर लोग ढेरों ब्लॉग्स को बुकमार्क या सबस्क्राइब कर लेते हैं। वे ऐसे बिन्दुओं के बारे में तय कर लेते हैं, जिनपर उन्हें काम करना है और अगले दिन से ही जीवन में आशातीत परिवर्तन की अपेक्षा करने लगते हैं। उसके दूसरे दिन वे अपने जीवन में उतारने के लिए कुछ और बातें छाँट लेते हैं और नित-नए खयाली पुलाव बनाने लगते हैं।
यहाँ एक ही समस्या है जिससे सभी जूझते हैं और वह यह है कि शॉर्ट-टर्म उपाय कभी भी लॉंग-टर्म सुधार की ओर नहीं ले जा सकते। अपने व्यक्तित्व में दस नए सुधार लाने के स्थान पर यदि लोग केवल चार सुधार ही लागू करने के बारे में सोचें, तो भी इसमें सफलता पाने का प्रतिशत नगण्य है। किसी भी व्यक्ति के चित्त की दशा और उसके कामकाज की व्यस्तता के आधार पर तीन या अधिकतम दो सुधार ला सकना ही बहुत कठिन है।
आप चाहें तो एक झटके में ही स्वयं में पाँच सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। उदाहरण के लिए: आप सुबह जल्दी उठना, रोजाना व्यायाम करना, शक्कर का कम सेवन करना, अपनी टेबल को व्यवस्थित रखना, स्वभाव में खुशमिजाजी लाना आदि कर सकते हैं हालाकि लंबी अवधि के लिए इन सरल उपायों को साध पाना ही कठिन है और अक्सर ही इनमें से एक-एक करके सभी सकारात्मक उपाय आपका साथ छोड़ देते हैं।
आपकी असफलता के पीछे आपका मानसिक अनुकूलन है। कुछ रिसर्च में यह पता चला है कि एक सरल आदत को व्यवहार में लाने के लिए अठारह दिन लग जाते हैं और कठिन आदत को साधने में तीस से चालीस दिन लगते हैं। ऐसी रिसर्च कई बार बेतुकी भी होती हैं;  पर क्या आपको वाकई यह लगता है कि आप अपनी घोर व्यस्त दिनचर्या में तमाम ज़रूरी काम को अंजाम देते हुए अपना पूरा ध्यान पाँच न आदतें ढालने या सुधारने में लगा सकते हैं?
नहीं। मुझे तो ऐसा नहीं लगता।
ठहरिए। ज़रा साँस लीजिए
कुछ पल के लिए रुकें। ऐसी एक दो बातों को तलाशि जो आप वाकई कर सकते हों और अगले दो-तीन सप्ताह तक पूरे मनोयोग से उन्हें साधने का प्रयत्न करें। कुछ समय बाद आपको उन्हें यत्नपूर्वक नहीं करना पड़ेगा और वे आपकी प्रकृति का अंग बन जायेगी।
और ऐसा कर लेने के बाद ही आपको यह पता चल पागा कि आप किसी न आदत या कौशल को साधने के लिए कितने अनुकूल हैं।
मैं आपसे यह नहीं कह रहा हूँ कि व्यक्तित्व विकास के ब्लॉग्स पढ़ना बंद कर दें। कई बार तो ऐसा होता है कि किसी चीज़ को पढ़ने से होने वाले मनोरंजन से भी उसे पढ़ने का महत्त्व बढ़ जाता है। जब भी आप मेरे ब्लॉग या अन्य ब्लौगों की पोस्ट पढ़ें तो यह न सोचें कि आपको इन बातों को अपने रोज़मर्रा के जीवन में उतारना ही है यदि ऐसा है तो आप मेरे प्रयासों को व्यर्थ ही कर रहे हैं। यदि आपको कुछ अच्छा लगे तो आप उसे कहीं लिख डालें और प्राथमिकता के अनुसार उन्हें सूचीबद्ध कर लें। इस सूची में आप वरीयता के अनुसार अपने जीवन में छोटे-छोटे परिवर्तन लाने के लिए कि जाने वाले उपायों को लिख सकते हैं। केवल एक या दो उपायों को अपना लें, उन्हें अच्छी आदत में विकसित करें, और आगे बढ़ जाएँ। इस तरह आप वाकई अपने में कुछ सुधार का अनुभव करेंगे अन्यथा आप केवल सतही बदलाव का अनुभव की करते रह जायेंगे। ध्यान दें, यदि मनोयोग से कुछ भी नहीं किया जाए तो सारे प्रयत्न व्यर्थ जाते हैं और झूठी सफलता को उड़न-छू होते देर नहीं लगती। (हिन्दी ज़ेन से)

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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