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Jan 1, 2024

उदंती.com, जनवरी 2024

वर्ष- 16, अंक- 5

नया सवेरा उतर धरा पर ,

लगा रहा किरणों का चन्दन

सुरभित कर कण-कण वसुधा का,

करता है  सबका अभिनन्दन ।

   - रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

इस अंक में

अनकहीः स्वदेशी न्याय प्रणाली का आरंभ   - डॉ. रत्ना वर्मा

आलेखः हमारा संविधान हर भारतीय के सपने को सशक्त बनाता है - सलिल सरोज

आलेखः राष्ट्रवाद और समावेशी विकास के परिणाम - प्रमोद भार्गव

मुद्दाः पत्रकारिताः नया समाज बनाने में भागीदारी का संकल्प  - सुरेन्द्र अग्निहोत्री

दो ग़ज़लः 1. इस वतन के वास्ते, 2. इस कदर गुस्साए हैं बादल  - बृज राज किशोर ‘राहगीर’

लघुकथाः कन्फ़ेशन  -  डॉ. सुधा गुप्ता

संस्मरणः अटल जी का वह प्रेरक पत्रः  - शशि पाधा

कविताः एक और चिट्ठी - अनीता सैनी दीप्ति

व्यंग्यः जीवन संध्या भोज - जवाहर चौधरी

निबंधः क्या आपने मेरी रचना पढ़ी है? - हज़ारी प्रसाद द्विवेदी

कविताः वानप्रस्थ  -  डॉ.  शिप्रा मिश्रा

पर्यावरणः पर्यावरणवाद के 76 वर्ष  - सुनीता नारायण

जयंतीः वैदिक ज्ञान से विश्व को आलोकित करते महर्षि महेश योगी  -  रविन्द्र गिन्नौरे

कहानीः माँ री!   - कुलबीर बड़ेसरों, पंजाबी से अनुवाद - सुभाष नीरव

ताँकाः उदय हुआ नया - भीकम सिंह

जिज्ञासाः ज्ञान और अज्ञान  -  ओशो

जीवन दर्शनः फोमो:खो जाने का भय  - विजय जोशी

3 comments:

अनीता सैनी said...

बहुत सुंदर सराहनीय अंक ढेरों शुभकामनाएँ।
मेरे सृजन को स्थान देने हेतु हृदय से आभार।
सादर

Anonymous said...

सुंदर अंक ! सबको खूब बधाई और शुभकामनाएं! 🌼😊

Ramesh Kumar Soni said...

समसामयिक विषयों पर केंद्रित स्तरीय साहित्यिक सभी स्तंभों का स्वागत है। सभी रचनाकारों को बधाई एवं संपादकीय टीम को एक और बेहतरीन अंक के संपादन हेतु शुभकामनानाएँ।