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Oct 21, 2014

उदंती.com-सितम्बर- अक्टूबर- 2014

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जलाओ दिये, पर रहे ध्यान इतना अँधेरा धरा पर, कहीं रह न जाए -गोपाल दास नीरज


2 comments:

ज्योति-कलश said...

विविध विषयों पर सुन्दर , सामयिक , सारगर्भित रचनाओं को संजोये बहुत उत्कृष्ट प्रस्तुति है | अनकही का कहा , हाइकु तथा अन्य कविताएँ ,विषयानुकूल आलेख ज्ञानवर्धक हैं | सभी रचनाकारों तथा सम्पादक मंडल को हार्दिक बधाई ,शुभकामनाएं , आभार !

Dr.Bhawna said...

Sabhi lekhkon ko meri hardik badhai....