मासिक वेब पत्रिका उदंती.com में आप नियमित पढ़ते हैं - शिक्षा • समाज • कला- संस्कृति • पर्यावरण आदि से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर आलेख, और साथ में अनकही • यात्रा वृतांत • संस्मरण • कहानी • कविता • व्यंग्य • लघुकथा • किताबें ... आपकी मौलिक रचनाओं का हमेशा स्वागत है।

May 1, 2026

कविताः वे दो प्रौढ़ स्त्रियाँ!

 - अंजू खरबंदा

ढक्का गाँव की एक गली से

गुज़रते हुए अचानक नज़र पड़ी

पार्क की एक बेंच पर बैठी

दो प्रौढ़ स्त्रियों पर…

मग्न थीं वे

अपने सुख-दुःख बाँटने में,

जैसे समय ठहर गया हो

उनकी बातों के आसपास!

उम्र के इस पड़ाव तक

आते-आते

कितने विषय होंगे उनके पास,

कितनी कहानियाँ, 

कितनी उपलब्धियाँ!

जो किसी किताब में दर्ज नहीं!

उनके चेहरे की झुर्रियों ने

सहे होंगे जीवन के

अनगिनत थपेड़े,

हर लकीर एक किस्सा 

कहती होगी,

इस मोड़ तक पहुँचते-पहुँचते

एक लंबा इतिहास

बस गया होगा उनकी स्मृतियों में,

उम्र बढ़ने के साथ-साथ

तजुर्बा भी गहराता गया,

कमी-बेशी को नज़रअंदाज़ कर

जीवन को गति देती रहीं 

वे दो प्रौढ़ स्त्रियाँ!

23 comments:

  1. बहुत सुंदर कविता।

    ReplyDelete
    Replies
    1. Anonymous04 May

      स्नेहिल आभार 🌹🌹

      Delete
    2. Anonymous17 May

      आपने उन्हें देखा और अनुमान लगाया लेकिन उनकी बातें उनकी संवेदनाएं और भी अनोखी और दिलचस्प होतीं

      Delete
  2. Anonymous04 May

    जीवन का सत्य। बहुत सुंदर रचना।बधाई। सुदर्शन रत्नाकर

    ReplyDelete
  3. Anonymous17 May

    सुंदर कविता - जय प्रकाश मानस

    ReplyDelete
  4. Anonymous17 May

    बढ़िया

    ReplyDelete
  5. Anonymous17 May

    बहुत सुंदर रचना है . जीवन सा सार होगा निश्चय ही उन प्रौढ़ स्त्रियों की बातों में . शुभकामनाएं .

    ReplyDelete
  6. निर्देश निधि17 May

    निर्देश निधि

    ReplyDelete
  7. यथार्थ का चित्रण करती सुंदर कविता।

    ReplyDelete
  8. हँसती मुस्कुराती स्त्रियाँ!!संवेदनशील रचना |

    ReplyDelete
  9. Anonymous17 May

    सुंदर कविता

    ReplyDelete
  10. Anonymous17 May

    सुंदर कविता, पूनम चंद्रलेखा

    ReplyDelete
  11. सार्थक सृजन

    ReplyDelete
  12. Anonymous17 May

    सुंदर कविता!

    ~सादर
    अनिता ललित

    ReplyDelete
  13. sushma gupta17 May

    बहुत सुंदर कविता सुंदर भाव

    ReplyDelete
  14. सत्य का एक खामोश पड़ाव। बढ़िया।
    बधाई।

    ReplyDelete
  15. Anonymous17 May

    बहुत सुंदर कविता 👌

    ReplyDelete
  16. Anonymous17 May

    Wow bahut sunder

    ReplyDelete
  17. राजीव17 May

    हम अगर थोड़े से भी संवेदनशील हो तो हमें हर तरफ ये ब्रह्मांड ,ये पेड़, ये पौधे, ये जानवर ये हवा,ये पक्षी, हमारा वायुमंडल सभी कुछ न कुछ कह रहे होते है हम ही कभी उनको सुनकर भी समझ नहीं पाते अपनी जिंदगी की अंधी दौड़ में बहुत कुछ मूल्यवान खो देते हैं 🙏

    ReplyDelete
  18. Nirmal Dalal17 May

    बहुत सुंदर रचना, बहुत बहुत बधाई

    ReplyDelete
  19. Bhawna Saxena18 May

    कमी-बेशी को नज़रअंदाज़ कर
    जीवन को गति देती रहीं …
    बहुत सुंदर भाव। यही तो करती हैं सब स्त्रियाँ।

    ReplyDelete
  20. बहुत सुंदर।

    ReplyDelete