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Mar 1, 2026

दस क्षणिकाएँ

 डॉ. कुँवर दिनेश सिंह

1. पुरानी जड़ें

गहरी पुरानी जड़ें

समय के साथ सुस्थिर;

फलों का भार उठातीं

वृक्ष का विश्वास स्थविर!


2. हवा की बात 

पेड़ों के बीच से

हवा ला रही है

मौन संदेसे कितने,

रहस्य न जाने कितने;

तुम चाहो तो बूझो,

उसके सुकून को महसूसो 

और जीवन के प्रवाह में

उसी लय में बह लो!

3. पुराना पत्थर 

हरी घास से घिरा

काई सना पुराना पत्थर 

बुन रहा कथानक नया,

परत दर परत कह रहा 

कोई किस्सा अनकहा

अतिशय फिसलन भरा,

इसे समझ-बूझ सकेगा

कोई साहसभाव भरा!

4. आकाश

अगण्य संभावनाएँ लिए 

चतुर्दिक् नीलाभ की

अनंतता पुकारती है!

तोड़कर बंधन सारे 

मुक्त कर आत्मा को

स्वतंत्रता पुकारती है!

5. छाया

ज्यों-ज्यों दिन ढल रहा है

छाया बढ़ती जा रही है,

ज्यों-ज्यों सूर्य झुक रहा है

दुनिया बदलती जा रही है,

दिवस ने जो बीज बोए हैं

रात सहेजने आ रही है,

नई पौध की प्रतीक्षा में

छाया तम से निभा रही है!

6. पगडंडी

वन से गुज़रते हुए,

पहाड़ी रास्ते पर,

ऊँची हरी घास और 

पत्थरों के बीच से,

एक नया घुमाव,

एक नया अनुभव, 

हर क्षण आश्चर्य,

हर मोड़ पर विस्मय,

सतत अनिश्चितता,

एक नई चुनौती,

एक नई आशा,

हर पल पेड़ों का साथ,

मिट्टी की सुगंध साथ,

धूप की मंद किरनें साथ,

मैं अकेला नहीं -

निर्जन वन में!

7. साँझ 

ढल रही है साँझ।

थका माँदा दिन,

फीका-फीका दिन का शोर,

रात का मद्धम ऑर्केस्ट्रा,

गोधूलि मंच का संगीत,

झींगुर मस्त गा रहे हैं

प्रकृति की अद्भुत् लोरी।

एक सुखद सम्मोहक लय

हवा में समा रही है।

इस क्षण में जो भी हो रहा है

मन कहता है ठीक हो रहा है।

8. पर्वत

घिर आया अंधकार,

पर्वत शांत, शयन में लीन;

प्रकृति कर रही पुकार,

सब रहस्य उनके अधीन!

9. धरातल 

पाँव के नीचे

मही -

ठोस, शांत, सच्ची,

उसके दांत हैं ढके;

धरती -

तुम्हें थामे है अभी!

10. बूढ़े पेड़

झुर्रीदार छाल,

अनेक वर्षों के वृत्त,

हर वृत्त में काल -

भीतर तक अंकित;

सब कुछ देखा है

इन बूढ़े पेड़ों ने,

तुम कहीं छिप रहे हो,

तो छिप रहे हो किससे?

19 comments:

  1. Anonymous02 March

    दिवस ने जो बीज बोए हैं

    रात सहेजने आ रही है,

    नई पौध की प्रतीक्षा में

    छाया तम से निभा रही है!
    सभी क्षणिकाएँ बहुत सुंदर हैं। हार्दिक बधाई ।सुदर्शन रत्नाकर

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    1. डाॅ. कुँवर दिनेश02 March

      हार्दिक आभार!🙏💐

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  2. रश्मि विभा त्रिपाठी02 March

    बहुत सुन्दर क्षणिकाएँ।
    हार्दिक बधाई आदरणीय

    सादर

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  3. डाॅ. कुँवर दिनेश02 March

    हार्दिक धन्यवाद!🙏💐

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  4. प्रकृति कर रही पुकार /सब रहस्य उनके अधीन.... प्रकृति केंद्रित बहुत सुन्दर, सार्थक संदेश देती क्षणिकाएँ। हार्दिक बधाई डॉ. कुँवर दिनेश जी 🌷

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    1. डाॅ. कुँवर दिनेश17 March

      हार्दिक आभार, महोदय!🙏🌷

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  5. झुर्री दार छाल, अनेक वर्षों के वृत--अति सुंदर!
    बधाई माननीय।

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    1. बहुत धन्यवाद!🙏

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  6. सभी क्षणिकाएँ बहुत सुन्दर हैं, मेरी हार्दिक बधाई स्वीकारें।

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    1. डाॅ. कुँवर दिनेश17 March

      हार्दिक धन्यवाद!🙏

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  7. Anonymous17 March

    सभी क्षणिकाएँ अच्छी हैं किंतु' पर्वत' और 'बूढ़े पेड़' मुझे बेहद अच्छी लगीं . हार्दिक बधाई .

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    1. Anonymous17 March

      रीता प्रसाद

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    2. डाॅ. कुँवर दिनेश17 March

      हार्दिक धन्यवाद!🙏

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  8. Anonymous17 March

    Very nice

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  9. Dr.Kanak Lata18 March

    प्रकृति के विविध रूपों पर प्रस्तुत क्षणिकाएँ बहुत ही अद्भुत हैं। पढ़कर ऐसा आभास हो रहा है जैसे इन क्षणिकाओं के साथ हम भी प्रकृति के इन सभी आयामों में विचरण कर रहे हैं... 👏🏻👏🏻🙏🏻

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    1. हार्दिक आभार!🙏

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  10. बहुत सुंदर।

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    1. हार्दिक धन्यवाद!🙏

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