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Jun 1, 2023

कविताः 18 जून पितृ दिवस- पिताजी चले गए








 - प्रियदर्शी खैरा

पिताजी चले गए

 और हम पिताजी हो गए

 अब बेटे जब हमसे

 आँख मिलाते हैं

 तो दीवार पर टँगे

 पिताजी मुस्कराते हैं

 कभी- कभी लगता है

 वे, फ्रेम से बाहर आएँगे

 और हमको समझाएँगे-

 बेटा, जैसा करोगे, वैसा भरोगे

 बेटे से कहो

 रात बहुत हो गई है, सो जाये

 कंप्यूटर बंद करें, बत्तियाँ बुझाए

 बिल बहुत आता होगा

 उसको समझाओ

 न पहले हम समझे

 न अब बेटा समझता है

 लगता है इतिहास

 पृष्ठ पलटता है।

सम्पर्कः 90 -91/1 यशोदा विहार चूना भट्टी, भोपाल म. प्र., मोबाइल 94069 25564

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