December 18, 2017

प्रेरक

खुद को हर दिन बेहतर बनाइए
रोज़ एक
मेंढक खाइए 
ऊपर वाली लाइन पढ़कर चौंकिए नहीं। सुबह उठने पर आपको सबसे पहला काम यही करना है- आपको एक मेंढक खाना है।
ओह! तो आप भी मेरी तरह शाकाहारी हैं- कोई बात नहीं-  फिर भी आप सुबह-सुबह एक मेंढक खा सकते हैं।
शायद मार्क ट्वेन ने ही यह कहा था, ‘यदि आपका दिन का सबसे पहला काम एक मेंढक खाना है तो बेहतर होगा कि इसे आप सुबह उठते ही कर लें। और यदि आपको दो मेंढक खाने हों तो उनमें से बड़े वाले मेंढक को पहले खाना सही रहेगा।
सुबह उठकर मेंढक खाने का तात्पर्य यहाँ दिन में सबसे पहले उस काम को पूरा कर देना है जिसे आपको मजबूरी में करना है। आप यह काम बिल्कुल भी नहीं करना चाहते। लेकिन आपको यह काम हर हाल में जल्द-से-जल्द करना है। यह वह काम है जिसे आज करने का संकल्प लेकर आप रात में सोए थे।
मेंढक खाने का अर्थ यह है कि आपको इसे हर हाल में करना है अन्यथा मेंढक आपको खा जाएगा- मतलब आप पूरा दिन इसे टालते रहेंगे और काम नहीं हो पाएगा। लेकिन अपना मन मारकर, अपने कलेजे पर पत्थर रखकर, कुछ समय के लिए टिके बैठे रहकर, कुछ देर के लिए दुनिया और दोस्तों से खुद को काटकर यदि आपने यह काम पूरा कर लिया तो आपके ऊपर से बड़ा बोझ उतर जाएगा। आप खुद को हल्का महसूस करेंगे। आपका पूरा दिन अच्छे से बीतेगा। आपमें यह भावना उत्पन्न होगी कि आपने कुछ अचीव कर लिया है और आप चाहें तो और भी कठिन काम कर सकने में सक्षम हैं।
आप इन मेंढकों की पहचान कैसे करेंगे?
यह बहुत आसान है। अपने काम को इन कैटेगरीज़ में बाँट लीजीए-
- वे काम जिन्हें आप करना चाहते हैं और जिन्हें करना ज़रूरी है।
- वे काम जिन्हें आप करना चाहते हैं लेकिन जिन्हें करना ज़रूरी नहीं है।
- वे काम जिन्हें आप नहीं करना चाहते पर जिन्हें करना ज़रूरी भी नहीं है।
- वे काम जो आप करना नहीं चाहते, लेकिन जिन्हें करना बहुत ज़रूरी है।
मेंढक वे काम हैं जिन्हें आप बिल्कुल भी नहीं करना चाहते लेकिन जिन्हें करना बहुत ही ज़रूरी है। इनका कोई आल्टरनेटिव नहीं है। ये काम आपको ही करने हैं। कोई दूसरा इसमें आपकी मदद नहीं करेगा।
किसी भी ज़रूरी काम को करने में हम टालमटोल इसलिए करते हैं कि हममें उसे करने की इच्छा नहीं होती या पर्याप्त मोटीवेशन नहीं होता या हमें वह बहुत कठिन लगता है। हमें हमेशा यही लगता है कि हम किसी दिन वक्त निकालकर उसे जैसे-तैसे पूरा कर लेंगे लेकिन वह दिन कभी नहीं आता। हमें उसे हर हाल में जल्द-से-जल्द पूरा करना है लेकिन उसे करना टलता रहता है। डेडलाइनें हमारे सर पर सवार हो जाती हैं। ऐसे में यदि हम झक मारकर वह काम कर भी लेते हैं तो वह इम्प्रैसिव नहीं होता। उसे देखकर कोई हमारी तारीफ़ नहीं करता।
इसलिए हर दिन सुबह-सुबह एक मेंढक खाने की आदत डाल लीजिए। शुरुआत में यह काम बहुत कठिन लगेगा। लेकिन जैसे-जैसे आप यह काम करते जाएंगे, आपको अच्छा लगने लगेगा और आपके काम में और जीवन में अभूतपूर्व सुधार आएगा। आप हर दिन बेहतर बनते जाएंगे।
तो कल से शुरुआत करें। (हिन्दी ज़ेन से)

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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