October 05, 2020

क्षणिकाएँः स्मृतियाँ

-रश्मि शर्मा
जंगल में खिला है पलाश
स्मृतियाँ हैं तुम्‍हारी 
है बैंजनी आकाश
और
सूखे पत्‍तों से घिरा मधुमास। 
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स्मृतियों में है 
कोई सुगन्ध, कुछ रंग 
गुज़र कर भी कहाँ 
गुजरता है सब कुछ जीवन से..।
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स्मृतियों में बसी होती है
गोधूली बेला
और
गोधूली बेला में
स्मृतियों के सिवा कुछ नहीं बचता....।  

राँची, झारखंड

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