October 02, 2018

मेरे सामने वाली गली

मेरे सामने वाली गली
-मंजूषा मन
सुबह सबेरे मुँह अँधेरे
सुनाई देने लगती हैं पदचाप..
बुजुर्ग स्त्रियों की...
जो चुन रहीं होती हैं पूजा के फूल
साथ में करतीं बातें 
किसी धार्मिक कहानी
बाबा के प्रवचन पर,
कुछ बुजुर्ग पुरुष
हाथों में छड़ी थामे
साझा कर रहे थे अपने सुख दुख

याद कर रहे हैं गुजरे दिन
टहलते हुए
मेरे घर के सामने वाली गली में,
इसी गली में 
गूँजती है –‘’आलू, टमाटर, भटा ले लो....’’-की आवाज,
अलसुबह ही 
सिर पर सब्जी की टोकरी लिये
निकल पड़ती है घर से
मेरी गली में टेर लगाती...
इसकी आवाज का इंतज़ार रहता है
कई घरों की रसोई को...
इसी गली में 
बच्चे खेलते हैं क्रिकेट
तीन लकड़ियाँगाड़कर
हाँ... 
कुछ बच्चों के स्कूल का ऑटो भी आता है
हॉर्न बजाते,
माँओं की टाटा... बाय बाय
सुनाई देती है... 
और दिखाई देते हैं आंखों में तैरते
जाने कितने सपने,
यहीं सुनाई देती है.... एक पुकार
ओ सुनीता... हो गया तेरा काम
और बस....
इकट्ठी हो जातीं हैं स्त्रियाँ
अपने अपने काम का हाल लेकर,
सुख-दुख की बातें करतीं
चूड़ियाँ खनकतीं
टी. वी. सीरियल की बातें करतीं
बच्चों के ऊधम का बखान करतीं,
पति का प्यार और डाँट सुनातीं
नई साड़ी... नए गहने दिखातीं,
हँसी ठिठोली भी...
ये मिलकर करतीं हैं मोल-भाव

फेरीवालों से 
दुआ सलाम कर
घुस जातीं हैं घर में 
बचे काम निपटाने।
शाम ढले लौटने लगते हैं 
काम पर गए पुरुष
गली में शोर मचाते बच्चे
भागने लगते हैं पापा... पापा-कहते
अपना खेल छोड़...
रात ढले
मुन्नू, चुन्नू के पापा.. और दूसरे पुरुष
देश -दुनिया की करते हैं चर्चा
सुनते हैं बढ़ रहे परिवार का खर्चा,
होतीं हैं समाचार की बातें...
और फिर शुभरात्रि...
जाने क्या क्या घटता है
मेरे घर के सामने वाली गली में
कितनी जिंदा है 
मेरे घर के सामने वाली गली,
यहाँ जी रहा है अब भी
अपनापन... और प्रेम।

सम्पर्कः अम्बुजा सीमेंट फाउंडेशन- भाटापारा,ग्राम- रवान (Rawan)
जिला- बलौदा बाजार (Baloda Bazar) छत्तीसगढ़ - 493331 , मोबाइल 09826812299

2 Comments:

दिलीप कुमार वर्मा said...

बहुँत ही बारीक नजर जैसे बैठे बैठे प्रत्येक घटना को देखा गया हो।सुंदर चित्रण। बधाई मंजूषा जी।आपने जो जिया है वही लिखा है।

Unknown said...

बचपन की यादें ताजा हो गईं बढ़िया भावपूर्ण रचना सै पकिचय कराने का सादर धन्यवाद लेखनी यूं ही शब्दों को सार्थक बनाती रहे...बधाई शुभेच्छा
राजेश शुक्ल,जामुल ए सी सी सीमेंट.

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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