March 10, 2017

दोहे:

         भेद-भाव को मेटता होली का त्योहार
             - डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
फागुन में नीके लगें, छींटे औ' बौछार।
सुन्दर, सुखद-ललाम है, होली का त्योहार।।

शीत विदा होने लगा, चली बसन्त बयार।
प्यार बाँटने आ गया, होली का त्योहार।।

पाना चाहो मान तो, करो मधुर व्यवहार।
सीख सिखाता है यही, होली का त्योहार।।।

रंगों के इस पर्व का, यह ही है उपहार।
भेद-भाव को मेटता, होली का त्योहार।।।

तन-मन को निर्मल करे, रंग-बिरंगी धार।
लाया नव-उल्लास को, होली का त्योहार।।।

भंग न डालो रंग में, वृथा न ठानो रार।
देता है सन्देश यह, होली का त्यौहार।।

छोटी-मोटी बात पर, मत करना तकरार।
हँसी-ठिठोली से भरा, होली का त्योहार।।।

सरस्वती माँ की रहे, सब पर कृपा अपार।
हास्य-व्यंग्य अनुरक्त हो, होली का त्योहार।।।

1 Comment:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

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