May 16, 2014

बाल कविताएँ

 डॉ.भावना कुँअर
की दो बाल कविताएँ

मेरा घर
 आई जून की भरी दुपहरी
छाया देता भाये घर।

नीम -निबौंली से अक्सर ये
बने बिछौना मेरा घर।
चीं -चीं चिडिय़ा की बोली से
चहका रहता मेरा घर।
सभी यहाँ मिल करके रहते
खिल-खिल करता मेरा घर।
जंगल भी थर्राता है।
बाघ
बाघ ये जंगल का राजा है
फुर्तीला मोटा -ताजा है।
कपड़े पहने धारीधार
कभी न माने अपनी हार।
लम्बी छलाँग लगाता है
शिकार पकड़कर लाता है।
जब-जब ये गुर्राता है
जंगल भी थर्राता है।
Email-bhawnak2002@gmail.com
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शशि पुरवार की दो बाल कविताएँ
   1. चंदा मामा

चंदा  मामा प्यारे मामा
तुम जल्दी से आ जाना
प्यारे- प्यारे सपने जो
मेरी आँखों में लाना।
मामा तुम जब आते हो
मन को बहुत लुभाते हो
सभी मुझे यह कहते है
कितना हमें सताते हो।
चंदा मामा प्यारे मामा,
तुम जल्दी से आ जाना...!
मामा जब तुम आते हो
तोमाँ भी आ जाती है
प्यारी-प्यारी नई कथा
हमको रोज़ सुनाती है। 
चंदा मामा प्यारे मामा,
तुम जल्दी से आ जाना। 
मामा जब तुम आते हो
माँ लोरी भी गाती है
हाथों से थपकी देकर 
मीठी नींद सुलाती है।
चंदा मामा प्यारे मामा,
तुम जल्दी से आ जाना।
  2. नाना- नानी
नाना-नानी सबसे प्यारे
हमको ला लड़ाते है।
हमसे जब भी मिलने आते
खेल-खिलौने लाते है।
रोज पार्क में सुबह -सवेरे
हमको सैर कराते है।
खूब खेलते साथ हमारे
हँसकर मन बहलाते हैं
मम्मी-पापा के गुस्से से
हमको रोज़ बचाते है।
लड्डूपेड़े,रसगुल्ले भी
ये हमको दिलवाते है
हमसे गलती हो जाती जब
खूबहमें समझाते है।
-न बातें सिखलाकर
मन सबका बहलाते हैं।



सम्पर्क: p- 4, 2/1 सरकारी निवाससागर पार्क के सामनेकोजी कॉटेज के बाजू महाबल रोडजलगाँवमहाराष्ट्र- 4257001, Email- shashipurwar@gmail.com

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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