March 14, 2014

प्रेरक

भय और साहस
एक दिन, अफ्रीका के मैदानों में रहने वाले एक शिशु गौर (जंगली भैंसा) ने अपने पिता के पूछा, मुझे किस चीज से सँभलकर रहना चाहिए?
तुम्हें सिर्फ शेरों से बचकर रहना चाहिए, मेरे बच्चे, पिता ने कहा।
जी हाँ, उनके बारे में मैंने भी सुना है। अगर मुझे कभी कोई शेर देखा तो वहाँ से झटपट भाग लूँगा, शिशु गौर ने कहा।
नहीं बच्चे, उन्हें देखकर भाग लेने में समझदारी नहीं है, पिता गौर ने गंभीरता से कहा।
ऐसा क्यों? वे तो बहुत भयानक होते हैं और मुझे पकड़कर मार भी सकते है!
पिता गौर ने मुस्कुराते हुए अपने पुत्र को समझाया, बेटे, यदि तुम उन्हें देखकर भाग जाओगे तो वे तुम्हें पीछा करके पकड़ लेंगे। वे तुम्हारी पीठ पर चढ़कर तुम्हारी गर्दन दबोच लेंगे। तुम्हारा बचना तब असंभव हो जाएगा।
तो ऐसे में मुझे क्या करना चाहिए? शिशु गौर ने पूछा।
जब तुम किसी शेर को देखो तो अपनी जगह पर अडिग रहकर उसे यह जताओ कि तुम उससे भयभीत नहीं हो। यदि वह वापस नहीं जाए तो उसे अपने पैने सींग दिखाओ और अपने खुरों को भूमि पर पटको। यदि इससे भी काम न चले तो उसकी ओर धीरे-धीरे बढऩे लगो। यह भी बेअसर हो जाए तो उस पर हमला करके किसी भी तरह से उसे चोट पहुँचाओ।
यह आप कैसी बातें कर रहे हैं? मैं भला ऐसा कैसे कर सकता हूँ? उन क्षणों में तो मैं डर से बेदम हो जाऊँगा। वह भी मुझ पर हमला कर देगा, शिशु गौर ने चिंतित होकर कहा।
घबराओ नहीं, बेटे। तुम्हें अपने चारों ओर क्या दिखाई दे रहा है?
शिशु गौर ने अपने चारों ओर देखा। उनके झुँड में लगभग 200 भीमकाय और खूँखार गौर थे जिनके कंधे मजबूत और सींग नुकीले थे।
बेटे, जब कभी तुम्हें भय लगे तो याद करो कि हम सब तुम्हारे समीप ही हैं। यदि तुम डरकर भाग जाओगे तो हम तुम्हें बचा नहीं पाएँगे, लेकिन यदि तुम शेरों की ओर बढ़ोगे तो हम तुम्हारी मदद के लिए ठीक पीछे ही रहेंगे।
शिशु गौर ने गहरी साँस ली और सहमति में सर हिलाया। उसने कहा, आपने सही कहा, मैं समझ गया हूँ।
हमारे चारों ओर भी सिंह घात लगाए बैठे हैं।
हमारे जीवन के कुछ पक्ष हमें भयभीत करते हैं और वे यह चाहते हैं कि हम परिस्तिथियों से पलायन कर जाएँ। यदि हम उनसे हार बैठे तो वे हमारा पीछा करके हमें परास्त कर देंगे। हमारे विचार उन बातों के धीन हो जाएँगे जिनसे हम डरते हैं और हम पुरुषार्थ खो बैठेंगे। भय हमें हमारे सामर्थ्य तक नहीं पहुँचने देगा। (हिन्दी ज़ेन)

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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