August 25, 2012

रंग बिरंगी दुनिया

 भारत का सबसे लंबा परिवार पुणे में
इनसे मिलिए यह है भारत का सबसे 'लंबा' परिवार। इस कुलकर्णी परिवार में सभी सदस्य इतने लंबे हैं कि अब वे विश्व रेकॉर्ड बनाने जा रहे हैं। इस परिवार में हैं 52 साल के शरद कुलकर्णी, जिनकी लंबाई 7 फुट 1.5 इंच है। उनकी 46 वर्षीय पत्नी संजोत, जो 6 फुट 2.6 इंच लंबी हैं। कुलकर्णी की दोनों बेटियां भी 6 फुट लंबी हैं। उनकी बड़ी बेटी मुरूगा 22 साल की है और लंबाई है 6 फुट, छोटी बेटी सान्या जो सिर्फ 16 साल की हैं वह 6.4 फुट की हैं। परिवार के चारो सदस्यों की लंबाई मिला दें तो पूरी 26 फुट बैठती है। अब यह परिवार की कुल लंबाई 26 फुट पर नया विश्व रेकॉर्ड बनाने जा रहे हैं। कुलकर्णी और उनकी पत्नी का नाम लिम्का बुक ऑफ विश्व रेकॉर्ड में पहले से ही दर्ज है।
शरद कुलकर्णी और संजोत की शादी 1989 में हुई थी। कुलकर्णी को उम्मीद थी कि वे 'सबसे लंबे पति- पत्नी हैं और वे गिनेस बुक ऑफ रेकॉर्ड भी बना पाएंगे, लेकिन यह रेकॉर्ड कैलिफोर्निया के वेन और लॉरी हॉलक्विस्ट ने अपने नाम कर लिया था। दोनों की लंबाई 13 फुट 4 इंच थी।
इसके बाद अब कुलकर्णी परिवार को उम्मीद है कि वे इस बार दोनों बेटियों के साथ मिलकर जरूर गिनीज बुक में अपना नाम दर्ज करवा लेंगे। इस परिवार का अपनी लंबाई के बारे में कहना है कि जब आप दूसरों से अलग होते हैं तो लोग आपको देखते हैं थोड़ा अजीब तो लगता है लेकिन जब आपकी यही अलग पहचान दुनिया तक पहुंचती है तो अच्छा लगता है। हमें उम्मीद है कि सबसे लंबे परिवार का विश्व रेकॉर्ड बनाने में हम जरूर कामयाब होंगे।

6100 मगरमच्छ

चीन में एक किसान और व्यवसायी जिआंगसू प्रांत के फुनिंग शहर में रहने वाले याओ शाओजुंग ने मगरमच्छों के लिए एक फार्म बनाया है, जिसमें करीब 6100 मगरमच्छ पल रहे हैं। वे 2004 से इन मगरमच्छों को पाल रहे हैं।
याओ को सिआमेस मगरमच्छों में विशेषज्ञता हासिल है और उसने हाल ही में थाईलैंड से 36 मगरमच्छ खरीदे हैं। सिआमेस मगरमच्छ ऊष्ण कटिबंधीय इलाकों में रहते हैं और याओ इनको तापमान में आए बदलाव से बचाने के लिए सर्दियों में सौर ऊर्जा वाले ग्रीन हाउस में रखते है।
याओ के फार्म में सबसे बड़े मगरमच्छ का वजन 350 किलोग्राम है। मुख्यत: दक्षिण-पूर्वी एशिया में पाए जाने वाले सिआमेस मगरमच्छों को विलुप्त हो रही प्रजाति माना जाता है। कुछ वन्यजीव कार्यकर्ताओं के मुताबिक दक्षिणी चीन के कुछ शहरों में इनके मांस को बहुत चाव के साथ खाया जाता है।

प्रकृति की अनमोल कलाकारी

कुदरत के रंग भी अनोखे होते हैं यह अपने अजब- गजब रंग दिखाती ही रहती है। अब जरा नीचे के इस चित्र को देखिए ऐसा लगेगा मानों कोई औरत के आकार का पुतला पेड़ पर लटक कर रहा है। लेकिन सच तो यह है कि यह एक अनोखा फूल है जिसे नारीलता फूल कहते हैं। यह यह एक दुर्लभ फूल है जो 20 साल के अंतराल पर खिलता है। यह भारत के हिमालय और श्रीलंका तथा थाईलैंड में पाए जाने वाले एक पेड़ में खिलता है। हिमालय में इसे इसके आकार के कारण नारीलता फूल कहा जाता है। जब यह फूल खिलता है तो पूरे पेड़ पर चारो तरफ औरत नुमा यह फूल लटके रहते हैं और हमें सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि महिला के बनावट का यह फूल है वाकई में दुर्लभ एवं प्रकृति की अनमोल कलाकारी है।

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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