October 23, 2010

कलमाड़ी जोक्स

राष्ट्र मंडल खेलों को लेकर पिछले दिनों बहुत सारी गड़बडिय़ों की चर्चा रही। देश की बदनामी से आहात भारत की जनता अपना गुस्सा कलमाड़ी पर एसएमएस के माध्यम से व्यक्त करती रही। पढि़ए उसी गुस्से की कुछ बानगी जो जवाहर चौधरी ने हमें भेजे हैं-
क्त नाम पर सहमति न बन पाने के कारण कलमाड़ी साहब के हाथ से एक कुकरी शो का ऑफर निकल गया...चैनल शो का नाम 'खाना-खजाना' रखना चाहता था और कलमाड़ी इस जिद्द पर अड़े थे कि उसका नाम 'खाना खा जाना' रखा जाए!
क्त कलमाड़ी को भारत रत्न दिए जाने की मांग के बीच पाक सरकार ने कलमाड़ी को निशान-ए-पाकिस्तान सम्मान से नवजाने का फैसला किया है... उसका मानना है कि भारत की जितनी बदनामी वो पिछले साठ सालों में नहीं कर पाए उससे ज्यादा इस शख्स ने पिछले छह दिनों में करवा दी है!
क्त कलमाड़ी ने हाथ दे कर रिक्शे वाले को रोका और पूछा... बस स्टैंड चलना है... कितने पैसे दोगे?
क्त कलमाड़ी का कहना है कि उनके साथ धोखा हुआ है... पहले उन्हें बताया गया था कि खेल दो हजार दस में नहीं दस हजार दो में होने हैं!
क्त कलमाड़ी को काटने के लिए मच्छरों का कल एक इवेंट होना था... मगर... आखरी वक्त पर ज्यादातर मच्छरों ने अपना नाम वापिस ले लिया!
क्त खबर है कि पिछले तीन दिनों में एक लाख लोगों ने नाम परिवर्तन की सूचना अखबारों में दी है.... और क्या ये महज इत्तेफाक है कि इन सभी के नाम सुरेश हैं!
क्त अधूरी तैयारियों से परेशान कलमाड़ी ने अपना सिर पीटा... कहा स्साला कोई भी अपना वादा नहीं निभाता... आतंकी कह गए थे... खेल नहीं होने देंगे... पता नहीं कहां रह गए?
क्त दोस्तों, रात को जूतों की एक माला कलमाड़ी के पोस्टर पर डाली थी...सुबह उठ कर देखा रहा हूं तो उसमें से दो जूते गायब हैं!
क्त बेइज्जती की इंतहा... कलमाड़ी के कुत्ते ने उन्हें देख पूंछ हिलाना बंद कर दिया है।
ईमेल -jc.indore@gmail.com

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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