July 11, 2010

19 करोड़ में बिका दुनिया का सबसे बड़ा सिक्का

दुनिया का सबसे बड़ा सिक्का 'मैपल लीफ 2007' वियेना में 40 लाख 30 हजार डॉलर (करीब 18 करोड़ 60 लाख रुपये) में बिका। कीमती धातुओं का कारोबार करने वाली स्पेन की कंपनी ने 100 किलोग्राम वजन के इस सिक्के को खरीदा। सोने के सिक्के को वर्ष 2007 में कनाडा में बनाया गया था। इसकी कीमत 10 लाख कनाडियन डॉलर आंकी गई थी। स्पेन की बहुमूल्य धातु व्यापार कंपनी ओरो डायरेक्ट ने इस सिक्के को खरीदा।सिक्के का व्यास 53 सेंटीमीटर और शुद्धता 99.99 फीसदी है। गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड्स के नवीन संस्करण में यह सिक्का दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण सिक्के के तौर पर दर्ज है।
सिक्के के अग्रभाग पर एलिजाबेथ द्वितीय का चित्र है। जबकि पिछले भाग पर हिस्से कनाडा का राष्ट्रीय चिह्न मैपल लीफ बना है। दुनिया में मैपेल लीफ 2007 सिक्के सिर्फ पांच हैं। इसमें एक महारानी एलिजाबेथ द्वितीय और दो दुबई में अज्ञात निवेशकों के पास है। पांचवें के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
विश्व के सबसे बड़े सोने के सिक्के की नीलामी उसकी आंकी गई कीमत से कहीं ज़्यादा पैसों में हुई। नीलामी घर का कहना है कि ऐसा विश्व में सोने के तेजी से बढ़ रहे दामों के कारण हुआ है।
भारत जिसे सोने की चिडिय़ा कहा जाता है। पर हमारे अपने ही देश के सिक्के गायब हो गए है। ऐसे में नायाब सिक्के बनाने के बारे में भारत सोच भी नहीं सकता। इतिहास में अगर झांके तो हमारे पास ऐसे बहुमूल्य सिक्के मौजूद थे जिन्हें देखकर ही तो अंग्रेज हमें लूटने आए थे। अगर आज हम अपने उन ऐतिहासिक सिक्कों को ढूंढ कर अपने संग्रहालय में जमा कर दें तो भारत सिक्कों के मामले में सबसे धनी देश कहलाएगा।

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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