June 05, 2010

वापसी

- अब्दुल कलाम
मैंने जब भी तुमसे
कुछ कहना चाहा
तुम हमेशा
मुंह फेरकर चल दिए

मैं दूर तक
तुम्हें जाता देखता रहा
कुछ कहता भी तो कैसे
दरमियान लम्बे फासले थे।

तुम आसमान छूते
महलों में थी
और मैं बरसात में
टपकते हुए छत के नीचे
कोई महफूज कोना
तलाश रहा था।

आज जब
हाथ को हाथ
नहीं सूझ रहा है
दुश्वारियां बढ़ती जा रही हैं


ऐसे में तुम्हारी वापसी
जैसे आखिरी बार
बंद होती पलकों पर
कोई धीमे से
हाथ रख दे
और नींद आ जाए।

चुपके चुपके
लम्हा लम्हा
जख्म रिसा
बनकर नासूर
पत्थर दिल को
दिल देकर
यह किया कुसूर

पलछिन पलछिन
तुम याद आए
बनकर दर्द
तपी हवाएं
जो थी अब तक
शीतल सर्द
मौसम मौसम
वो बदले हैं
दिल टूटा
तुमने क्या मुंह फेरा
मुझसे जग रूठा

चुपके चुपके
कोई आया
मन के द्वारे
रोशन हो गए अंतर्मन
जो थे अंधियारे।

1 Comment:

देवमणि पांडेय said...

दोनों कविताएं बहुत अच्छी लगीं।
-देवमणि पाण्डेय
devmanipandey.blogspot.com/

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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