November 03, 2020

कविता- दीपावली मनाएँ कैसे

 - डॉ. शिवजी श्रीवास्तव

अभी दशानन मरा नहीं है

प्रियवर, दीप जलाएँ कैसे

दीपावली मनाएँ कैसे? 

उन्मादी उन्मुक्त निशाचर

अट्टहास करते,हर पल छिन।

जनकसुता बंदिनी अभी तक,

काट रहीं दुःख के दिन,गिन- गिन।

अब भी कई अहल्याओं के ,

छल से होते चीर-हरण।

शबरी अब तक बाट जोहती,

कब आएँगे रघुनन्दन।

 

राजपथों पर भी दामिनियाँ 

डरी- डरी- सी चलती हैं

नरपशुओं की गिद्ध दृष्टि से

अपनी लाज बचाएँ कैसे.

प्रभु जी ,घर अब जाएँ  कैसे?

 

पुतले फूँकें, दीप जलाएँ,

सदियों की परिपाटी है।

किन्तु अभी तक  रावण की

अगणित छायाएँ बाकी हैं।

इतिहासों के काले पन्ने

ये छायाएँ खोल रही हैं

विद्वेषों की विषम कालिमा,

वर्तमान मे घोल रही हैं।

 

आओ हम सब मिलकर सोचें

असफल इन्हें बनाएँ कैसे,

इतना कलुष मिटाएँ कैसे।

दूर धरा से तम हो सारा,

ऐसे दीप जलाएँ कैसे?

4 Comments:

Sudershan Ratnakar said...

अभी दशानन मरा नहीं है
प्रियवर, दीप जलाएँ कैसे। बहुत सुंदर भाव ,कटु सत्य

शिवजी श्रीवास्तव said...

हार्दिक आभार सुदर्शन रत्नाकर जी

vishwa.m.srivastava said...

अभी दशानन मरा नहीं है , दीपावली मनायें कैसे ।
बहुत सुन्दर ।।
वर्तमान परिवेश के परिपेक्ष्य में सटीक रचना !!

प्रीति अग्रवाल said...

बहुत सुंदर औऱ सार्थक कविता शिवजी भैया...सच है, जब तक सब के जीवन मे सुरक्षा एवम संतोष का उजाला नहीं, तब तक दीपावली केवल एक औपचारिकता विवश दिखावा प्रतीत होता है....!आपको अनेकों बधाई एवं शुभकामनाएँ!!

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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