October 05, 2020

कविताः सरहद


-एकता चौधरी

आँख फड़क रही थी
दो तीन रोज़ से
आज खबर मिली
सरहद पर गोली चल गई
शाम ढले.....

क्या हुआ 
कुछ बुरा हो तो,
कौन था 
वो.....

आजकल तो,
सरहद 
सुनसान हैं,
सन्नाटे बस 
सुनती हैं,

उम्मीद
किसी के घर 
वापस आने की
आज बूढ़ी
हो चली है,

शायद
कभी भी
ये ज़मीं छोड़
ज़मीं में 
फ़्न हो जाने वाली है....

दीवार-
बैसाखी,
छत का छाता,
अल्हड़ पगडंडी,
वो चर्च वाली गली
अकेले होने वाले हैं
सदा के लिए,

ना देखने के लिए
बाट 
कभी 
किसी की.....

कोई युग 
बदलेगा
शायद
सन्नाटों को भरने
के लिए,

कई जमाने
सुधारने होंगे
सरहद की 
हद
फिर से
थाम लेने के लिए....

और
सोच के देखो
बंजर सरहद में
क्या कुछ बचा है...
जो रोएगा 
कुछ खोने से,
कुछ बुरा और
हो जाने से,

बस तीन दिन
आँख 
मेरी फड़की,
और 
सरहद की गोली 
आज
शाम
दिल से पार निकल गई.....!!!

लेखक के बारे में-   कार्यक्षेत्र: रक्षा मंत्रालय उद्यम- भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, (गाजियाबाद इकाई),  पद: उप प्रबंधक,  शैक्षिक योग्यता: बी. ई. ( इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्यूनिकेशन), अभिरुचि: शतरंजकविता लेखनबागवानी, मूल निवास: सुजानगढ़, राजस्थान,  वर्तमान पता: पटेल गार्डन, द्वारका मोड़, नई दिल्ली ११००७८, 
choudhary.ekta@gmail.com, मोबाइल नम्बर- 8287513885

3 Comments:

priyadarshi Khaira said...

सुंदर भाव व्यंजना अच्छी कविता

priyadarshi Khaira said...

सुंदर भाव व्यंजना अच्छी कविता

PRAMOD SAXENA said...

Very touching

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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