May 15, 2018

लघुकथा

ख़लील जिब्रान की तीन लघुकथाएँ
अनुवाद-  सुकेश साहनी
1-प्लूटोक्रेट
मैंने भ्रमण के दौरान एक द्वीप पर आदमी के चेहरे और लोहे के खुरों वाला भीमकाय प्राणी देखा, जो लगातार धरती को खाने और समुद्र को पीने में लगा हुआ था। मैं बड़ी देर तक उसे देखता, फिर नज़दीक जाकर पूछा, 'क्या तुम्हारे लिए इतना काफी नहीं है? क्या तुम्हारी भूख प्यास कभी शान्त नहीं होती?’
उसने जवाब दिया, 'मेरी भूख-प्यास तो शान्त है। मैं इस खाने- पीने से भी ऊब चुका हूँ, पर डरता हूँ कि कहीं कल मेरे खाने के लिए धरती और पीने के लिए समुद्र नहीं बचा तो क्या होगा?’
2-कोरा कागज़
बर्फ से सफेद कागज़ ने कहा, 'इसी शुद्ध सफेद रूप में मेरा निर्माण हुआ था और मैं सदैव सफेद ही रहना चाहूँगा। स्याही अथवा कोई और रंग मेरे पास आकर मुझे गंदा करे इससे तो मैं जलकर सफेद राख में बदल जाना पसन्द करूँगा।
स्याही से भरी दवात ने कागज़ की बात सुनी तो मन ही मन हँसी, फिर उसने कभी उस कागज़ के नज़दीक जाने की हिम्मत नहीं की। कागज़ की बात सुनने के बाद रंगीन पेन्सिल भी कभी उसके पास नहीं आई।
बर्फ सा सफेद कागज़ शुद्ध और कोरा ही बना रहा....शुद्ध कोरा...और रिक्त।
3-सफाई
दार्शनिक ने गली के सफाईकर्मी से कहा, 'मुझे तुम पर दया आती है, तुम्हारा काम बहुत ही गंदा है।
मेहतर ने कहा, 'शुक्रिया जनाब, लेकिन आप क्या करते हैं?’
प्रत्युत्तर में दार्शनिक ने कहा, 'मैं मनुष्य के मस्तिष्क उसके कर्मो और चाहतों का अध्ययन करता हूँ।
तब मेहतर ने गली की सफाई जारी रखते हुए मुस्कराकर कहा, 'मुझे भी आप पर तरस आता है।

सम्पर्क: सुकेश साहनी 185,उत्सव,महानगर पार्ट–2 बरेली–243122 (उ.प्र.), Email- sahnisukesh@gmail.com

0 Comments:

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

-0-

लेखकों सेः उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष