January 27, 2018

मूक साथी

मूक साथी
 -सत्या शर्मा 'कीर्ति'

आज फिर जब कहा बेटे ने "माँ अब और फालतू का इमोशन मत दिखलाइए कल से इस घर को तुड़वा कर नए स्टाइल का बनवाऊंगा। अब इस पुराने से घर में मेरा दम घुटता है।"
पर! आज वीणा जी ने कोई प्रतिरोध नहीं किया बस अपनी नम आँखों और काँपते हाथों से घर की दीवारों को यूँ सहलाया जैसे अंतिम बार अपने इस मूक सहभागी के अहसानों का सारा कर्ज उतार देना चाहती हों।
लोगों से अकसर सूना है " दीवारों के भी  कान होते हैं" लेकिन उन्होंने तो इसे खुद के साथ जीते हुए देखा है।
आज भी याद है शादी के प्रथम आगमन पर कोहबर से सनी दीवारें हँस-हँस कर उसका स्वागत कर रही थी और जब उन्होंने हल्दी- अरपन लगे हाथों से अपने गृहप्रवेश की छाप इन दीवारों पर लगाईं थी तो जैसे इनकी आँखें ख़ुशी से छलक ही पड़ी थी।
बच्चों की छठी,  शादी पर जब शुभ स्वस्तिक युक्त आशीर्वाद जब इन दीवारों पर बनाया गया तो ये यूँ चमक उठी जैसे अपना स्नेह आशीष बच्चों पर लुटा रही हो।
और फिर जीवन का वो कारुणिक क्षण जब जीवन साथी उन्हें अकेला छोड़ चले गए तब इन्हीं दीवारों से लग  वो घण्टों फुट- फुट रोती थी तब भी लगता था ये उनकी करुण रुदन सुन उनकी वेदना की सहभागी बन मन ही मन रोती रहती है। फिर इन्हीं दीवारों की गोद में पति की तस्वीर लगा अकसर उन्हें निहारा करती थी।
जाने कितनी अकेली सुनसान रातों में उन्होंने अपने बचपन से लेकर आज तक की कितनी ही कही - अनकही , सुख - दुख की बातें इन्हीं दीवारों को सुनाई हैं ।
इसलिए आज इस घर से जाने के पहले वो अपने हाथों से इसकी आँखे, मुँह और कान सब बन्द कर देना चाहती हैं ,ताकि कल जब हथौड़े की चोट इन पर पड़े ,तो इनका दुःखद रुदन उन तक न पहुँच सके।
सम्पर्कः डी- 2, सेकेण्ड फ्लोर, महाराणा अपार्टमेंट, पी. पी. कम्पाउंड, राँची– 834001, झारखण्ड, Email : satyaranchi732@gmail.com

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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