October 24, 2017

कविता:

        पिता की अस्थियाँ...
             - सुशील यादव
पिता,
बस दो दिन पहले
आपकी चिता का
अग्नि-संस्कार कर
लौटा था घर....
माँ की नज़र में
खुद अपराधी होने का दंश
सालता रहा...
पैने रस्म-रिवाजों का
आघात
जगह- जगह, बार- बार
सम्हालता रहा....
00
आपका बनाया
दबदबा, रुतबा, गौरव, गर्व
अहंकार का साम्राज्य,
होते देखा छिन्न-भिन्न,
मायूसी से भरे
पिछले कुछ दिन...
खिँचे-खिँचे से चन्द माह,
दबे-दबे से साल
गुजार दी
आपने
बिना किसी शिकवा
बिना शिकायत
00
दबी इच्छाओं की परछाइयाँ
न जाने किन अँधेरे के हवाले कर दी
00
एक खुशबू
पिता की
पहले छुआ करती थी दूर से
विलोपित हो गई अचानक,
न जाने कहाँ...?
00
न जाने क्यों
मुझसे अचानक रहने लगे खिन्न
00
आज इस मुक्तिधाम में
मैं अपने अहं के दास्तानोंको
उतार कर
चाहता हूँ
तुम्हें छूना...
तुम्हारी अस्थियों में,
तलाश कर रहा हूँ
उन उँगलियों को....
छिन्न-भिन्न, छितराए
समय को
टटोलने का उपक्रम
पाना चाहता हूँ एक बार...
फिर वही स्पर्श
जिसने मुझे
ऊँचाइयों तक पहुँचाने में
अपनी समूची ताकत
झोक दी थी
00
पता नहीं  कहाँ कहाँ झुके थे
लड़े थे....
मेरे पिता
मेरी खातिर.... अनगिनत बार
00
मेरा बस चले तो
सहेज कर रख लूँ तमाम
उँगलियों के पोर-पोर
हथेली, समूची बाँह
कँधा... उनके  कदम...
जिसने मुझमें साहस का
दमजी खोल के भरा
00
पिता
जाने-अनजाने
आपको इस ठौर तक
अकाल, नियत-समय से पहले
ले आने का
अपराध-बोध
मेरे
दिमाग की कमजोर नसें
हरदम महसूस करती रहेंगी।

सम्पर्क- न्यू आदर्श नगर दुर्ग (छत्तीसगढ़), Email- sushil.yadav151@gmail.com

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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