April 20, 2017

लघुकथा

 बिचौलिए  
- मीना गुप्ता
दिसम्बर का महीना था ...ठण्ड अपनी जोरों पर थी। आस-पास की चीजों को अपदस्थ  करके कोहरे ने जबरदस्त अधिकार जमा रखा था .सुबह के पाँच बज चुके थे। पति ने कहा आज कॉलोनी में सुबह चार बजे से चार संदिग्ध लोग दिख रहे हैं.... मैंने व्यस्तता में जवाब दिया- तो पूछा लेना था आप लोग कौन हैं कहकर मैं मॉर्निंग-वाक के लिए निकल पड़ी धुंधलका था। गली के मोड़ पर पहुँची ही थी कि स्टाफ के कई लोग एक साथ झुण्ड बनाए हुए नजर आए। मैंने माजरा समझना चाहा... क्या हो गया सिन्हा सर?
...मैडम एकदम शुद्ध शहद है, ले लीजिए। हम सभी ने ली है ..पाण्डेय जी ने एक किलो लिया, बिसेन जी ने एक किलो लिया, बड़े बॉस ने भी दो किलो लिया है।
आप कैसे कह सकते है कि एकदम शुद्ध है ?
हमारे सामने ही निकाला है... समवेत स्वर में वे बोल उठे।
अच्छा तो ये वही लोग है... जो सुबह से कॉलोनी में घूम रहे हैं?
हाँ मैडम हम चार बजे से लगे हैं ....शहद निकलने वालों में से एक बोला।
अपने खाद्य के साथ चिपकी उन बेदम मक्खियों को देख मेरा मन लेने से इनकार कर गया।
मैंने पूछा आप लोग कहाँ से आए हैं ?
बोलेमैडम हम बहुत दूर के रहने वाले हैं ....
मुझे उन पर तरस आ गया... ठीक है दे दो- क्या रेट है? उसके बोलने से पहले ही स्टाफ के एक मेंबर ने चुपचाप उँगली से इशारा किया तीन। एक किलो शहद का तीन सौ देकर मैं घर आई। मैं खुश थी शुद्ध शहद तीन सौ में।
थोड़ी देर में बाहर से आवाज आई मैडम शहद ले लीजिए।
खिड़की से ही मैंने उन्हें बताया मैं ले चुकी हूँ . ...उनकी भरी हुई बाल्टी खाली हुई देख मैंने पूछा कितनी कमाई हुई?
उनमें से एक ने कहा ....तीन सौ।
मगर ... तुम्हारी बाल्टी तो भरी हुई थी!
हाँ ... भरी थी बीच में खाली हो गई।
मतलब?
कॉलोनी के बड़े सर ने पैसे नहीं दिए
क्यों?
बोलेहमने तुम्हें अन्दर आने को परमिट किया है...
बाकी ने?
बाकी बोले- हम तुम्हें लेकर आए हैं।
कहकर चारो जल्द ही कॉलोनी से बाहर हो गए कि कहीं बिचौलिए फिर न घेर लें।

0 Comments:

लेखकों से... उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।
माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। माटी संस्था कई वर्षों से बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से उक्त गुरूकुल के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (U.K.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर, रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी, रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से स्कूल जाने में असमर्थ बच्चे शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होंगे ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेंगे। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ.ग.) मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष