August 12, 2015

हाइकु

बिटिया

 -कमला निखुर्पा
1
पाती सहेली
गाती हवा के संग
खोई रे कहाँ।
2
डाल -डाल पे
पूछती फिरे पता
पगली हवा।
3
डरी पत्तियाँ
काँपी थरथराई
पीली हैं पड़ी।
4
मानता नहीं
निगोड़ा पतझर
गिराके छोड़े।
5
छुपाए तन
डालियों की ओट ले
सहमा तरु।
6
बदले रुत
जाएगा पतझर
हँसेगी कली ।
7
गाएगी पाती
मर्मर के स्वर में
जीवन- गीत।
8
शब्दों की नाव
संग- संग तिरते
नन्हे से भाव।
9
जीवन जंग
तुम संग रहना
हारूँगी नहीं।
10
तुमने  बाँधी
जो हिम्मत की डोर
टूटे ना कभी।
11
छू के भागी है
नटखट- सी हवा  
उड़ी चुनरी ।
12
छलक गई
यादों की गगरिया
भीगा जीवन।
13
आँखमिचौली
सुख और  दुख से
हार के जीती।
14
जलाती रही
चुनौतियों  की आँच 
कुंदन  हुई।
15
खुले कपाट
अंतस् चेतना  के जो,
फैला  उजास।
16
मैं रो पड़ी माँ,
भीग गया होगा ना
तेरा आँचल?
17
मौन हो तुम  
चुपचाप लोरियाँ
सूनी दुनिया।
18
कैसी दीवार
तुझ तक न जाए
मेरी पुकार।
19
उलझ गए
सारे रिश्तों के धागे
सुलझाओ माँ।
20
भेजी  रब ने
एक दिन  बिटिया
मेरी गोद में।
21
पायल बाँधे
छम-छम करती
तोतली बोली।
22
बीते बरस,
बचपन भी बीता
गुडिया खोई।
23
मेंहँदी रची
बिटिया के हाथों में
डोली भी सजी।
24
छलका गई
भर आँसू के प्याले
बाबुल-गली।
25
सूना है घर
सूनी मैया की आँखें
बाट  निहारे।
26
ढूँढ़े अखियाँ-
नटखट गुडिय़ा
खोई  कहाँ रे?
27
ढूँढ़े है मैया
वो नन्ही-सी गुडिय़ा,
आले पे पड़ी।
28
हाथों में लेके

दुलारे -पुचकारे
खिलौने को माँ।
29
सीने से लगाबेजान खिलौने को
रोए- बिलखे।
30
भीगा आँचल
भीग गई गुडिय़ा
देहरी भीगी।


सम्पर्क:  प्राचार्या, केन्द्रीय विद्यालय नं -2, कृभको, सूरत- गुजरात- 384515

2 Comments:

Unknown said...

Gagar mai sagar bhar diya aapne....aadbhut !!

Unknown said...

Gagar mai sagar bhar diya aapne....aadbhut !!

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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