February 10, 2015

लघु कथाएँ- -मुरलीधर वैष्णव

रब करदा है सो... 

 सुबह पाँच बजे का समय। वह सिर झुकाए सेंट्रल जेल की काल कोठरी के आगे बैठा था। कोई पैंतीस-छत्तीस साल का लंबी कद-काठी का गोरा-चिट्टा युवक। उसके उदास चेहरे पर मौत की छाया तैरती स्पष्ट दिखाई दे रही थी। बीस-पच्चीस मिनट बाद उसे वहाँ फाँसी दी जाने वाली थी। बतौर मजिस्ट्रेट फाँसी देखने का मेरा यह पहला ही अवसर था।
''भाई साहब माफ करना। इस वक्त आपसे कोई सवाल करना मुनासिब तो नहीं हैफिर भी यदि बुरा न मानें तो क्या आप बतलाएँगे कि आपके खिलाफ जो फाँसी का फैसला हुआ वह सही है या नहीं ?’ झिझकते हुए मैंने उससे पूछा।
''रब करदा है सो ठीक ही करदा है।‘’ उसने कुछ क्षण बाद एक लंबी आह भर आकाश की ओर देखते हुए कहा। 
''यानी कि सुपारी लेकर दो आदमियों की हत्या करने का आरोप आप पर सही लगा था?’’ मैंने उससे खुलासा जवाब की अपेक्षा की। 
''की करना हैसाबजीकहा नरब करदा है सो ठीक ही करदा है।‘’ उसने मुझ पर एक उदास दार्शनिक दृष्टि डालते हुए वही बात दोहराई।
मेरी उत्सुकता अभी भी शांत नहीं हुई थी।
''रब वाली आपकी बात तो सही है। फिर भी नीचे सेशन कोर्ट से राष्ट्रपति तक जो आपके खिलाफ फैसला हुआ हैवह तो सही है न।‘’ फिर भी मैं जिद कर बैठा।
''फैसले की बात छोड़ो साब। वह तो बिलकुल गलत हुआ है। मैंने उन बंदों को नहीं मारा। न उनके लिए कोई सुपारी ली। हाँ वे बन्दे हमारी आपसी गैंगवार की क्रास फायरिंग में जरूर मारे गए थे। लेकिन मेरे दुश्मनों ने मेरे खिलाफ झूठी गवाही देकर मुझे फसा दिया।‘’ अचानक वह झल्ला उठा। लेकिन उसके इस खुलासे से हम सभी स्तब्ध थे।
''फिर आप ऐसा क्यों कह रहे हैं कि रब करदा है सो ठीक ही करदा है।‘’अब मुझसे यह पूछे बिना नहीं रहा गया।
''इससे पहले मैंने सुपारी लेकर चार कत्ल किए थे और उन सब मुकदमों में बरी हो गया था।‘’ उसने बेझिझक स्वीकार किया।

 .रोशनी
बेटे की बारात धूमधाम से सजी थी। बैंड बाजे की फास्ट धुन पर दूल्हे के मित्र व परिजन खूब उत्साह-उमंग से नाच रहे थे। बैंड मास्टर अपने काम से ज्यादा वहाँ न्योछावर हो रहे नोट लपकने में लगा था। दूल्हे के चाचा ने खुशी के मारे जोश में आकर पचास के कड़क नोटों की पूरी गड्डी ही उछाल दी थी। नोट हथियाने के लिए बैंड पार्टीघोड़ी वाले और ढोल वालों में आपाधापी मच रही थी।
उधर गैस बत्ती के भारी लैम्प सिर पर ढोए ठण्ड में सिकुड़ रही क्षीणकाय लड़कियाँ मन मसोसे यह सब देख रही थी। उनके चेहरों पर इस अवसर से वंचित रहने का दु:ख और मायूसी की छाया साफ दिखाई दे रही थी। उनकी यह दशा देखकर दूल्हे के पिता का मन करुणा से भर गया। उसने सौ-सौ के कुछ नोट बेटे पर न्योछावर करके रोशनी ढो रही प्रत्येक लड़की को दो-दो की संख्या में थमा दिए।
इस अप्रत्याशित खुशी से दमकते उन लड़कियों के चेहरों से वहाँ फैली रोशनी कई गुना बढ़ गई थी।

संपर्क: ए-77, रामेश्वर नगरबासनी प्रथमजोधपुर-342005, मो.-9460776100

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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