August 15, 2014

क्या सचमुच स्वाधीन हम?

क्या सचमुच स्वाधीन हम?
- संजीव 

गहन अंधविश्वास है 
पाखंडों की रीत  
शासन की मनमानियाँ 
सहें झुका सर मीत 

स्वार्थ भरी नजदीकियाँ 
है  स्वार्थों की मीत
होते हैं परमार्थ नित
नेता हाथों फ़ौत

संसद में भी कर रहे  
जुर्म विहँस संगीन हम 
क्या सचमुच स्वाधीन हम?
*
तंत्र लाठियाँ घुमाता 
जन खाता है मार 
उजियारे की हो रही 
अन्धकार से हार 

सरहद पर बम फट रहे 
सैनिक हैं निरुपाय 
रण जीतें तो सियासत 
हारे, भूल भुलाय 

बाँट रहें हैं रेवड़ी 
अंधे तनिक न गम
क्या सचमुच स्वाधीन हम?
*
दूषित पर्यावरण कर  
मना रहे आनंद  
अनुशासन की चिता पर 
गिद्ध-भोज सानंद 

दहशतगर्दी देखकर 
नतमस्तक कानून 
बाज अल्पसंख्यक करें 
बहुल हंस का खून 

सत्ता की आँखें 'सलिल'  
स्वार्थों खातिर नम 
क्या सचमुच स्वाधीन हम?
*
सम्पर्क: 204 vijay apartment, napier town, Jabalpur-  482001
Email : salil.sanjiv@gmail.com , mo9425183244

Labels: ,

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home