April 16, 2014

हाइकु

...देता खूशबू 
सूखा गुलाब

- सुनीता अग्रवाल 
1
खुली किताब 
फिर देता खुशबू
सूखा गुलाब।
2
बाँटे सुगंध
फूलों को लूटकर
छलिया हवा।
3
सूरज चाँद
माँ की सेवा करें
पारियाँ बाँध।
4
धीर पर्वत
कभी चंचल नदी
नारी का चित्त।
5
पर्वत -गोदी
बाबुल का आँगन
खेलती नदी।
6
चीर के बढ़ी
रूढ़ियों का पर्वत
घायल नदी।
7
है सप्ताहांत
चहक रहे चूजे 
चिड़ी उदास।
8
कैसे हो तुम 
कामकाजी दम्पती
चैट में पूछे
9
मिले परिंदे 
सप्ताहांत छुट्टियाँ 
फिर उड़ेंगे।
10
खो गए कहीं
चाँद- तारे- नज़ारे
साथी हमारे।
11
दिशाविहीन 
भटक जाते राही 
राहें चलती।
12
दिन में खिले
सूरजमुखी रिश्ते
साँझ को बुझे
13
देखा जो तुम्हें
लगे गुनगुनाने
गुज़रे लम्हे।
14
हम हैं वहीँ
और तुम भी वही
वक्त बदला।
15
तुम सागर 
मैं होती जो सरिता 
मिलन होता।
16
कोई न सगा 
साए भी देते दगा 
दिन ढलते 
17
खुशियाँ नहीं
अक्सर धोखा देतीं
मायूसियाँ भी।
18
बंदूक चुप
बरसे कुछ शब्द
रिश्ते घायल।
19
जीवन -ग्रंथ
अनूठी प्रश्नावली
अनसुलझी।
20
शूल नही माँ 
बन फूल खिलूँगी 
तेरे अँगना।
21
भीगी पलकें
यादों की महफिल
तन्हा नहीं मैं।
22
गुजरे लम्हे
रंग जाते हैं मन
अकेला देख
23
मानो ना मानो
मुझमे चीखता है
तुम्हारा मौन।
24
जात की खाई
आरक्षण का पुल
पाट न पाई।
25
चुनावी खेल
जाति -समीकरण
प्रतिभा फेल।
26
गहरा कूप
संचित जलराशि
रोग अकूत।
27
देती जीवन
जल की हर बूँद
खोलो बंधन।
28
बंद कमरे
झिर्री तलाश रही
प्रेम –आलोक।
29
ढला दिवस
थकी जर्जर काया
ढूँढ़ती छाया।
30
जलाती  रिश्ते
शक की सिगरेट
बचती राख।
31
मन के रिश्ते 
बंधे प्रीत की डोर 
सदा  निभते
 
32
सँजोए रखे
फूलों से बेहतर
तेरे सितम।

सम्पर्कः द्वारा- गोबिन्द अग्रवाल
 B-6- रीगेन्ट टॉवरहरध्यानसिंह रोड
निकट एम सीडी बिल्डिंग, करोल बाग नई दिल्ली- 110005



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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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