February 02, 2014

सबसे बेहतर ये साल रहे

         सबसे बेहतर ये साल रहे
                                               - गिरीश पंकज
        वो जैसा भी था चला गयाअब जो आए खुशहाल रहे,
        बस यही दुआ हम करते हैं, सबसे बेहतर ये साल रहे।।
        बदले मन हर इक पापी का, ये बलात्कार अब रुक जाए
        क्यों तने रहें हम अपनों से, ये सर थोड़ा-सा झुक जाए
        ये दिल अपना घर पावन हो, क्यों जीवन में जंजाल रहे
        बस यही दुआ हम करते हैं सबसे बेहतर ये साल रहे।।
        न धोखा दे कोई हमको, ना झूठे वादे करें कभी 
        हम सच की राह पे चलें सदा, जुल्मी से क्यों कर डरें कभी,
        सबके हिस्से में हो थाली, हर इक जन मालामाल रहे
        बस यही दुआ हम करते हैं, सबसे बेहतर ये साल रहे।
        जो अपने सेवक हैं उनको, सेवा का कुछ तो फन आए
        उनके जीवन में सच्चाई, थोड़ा-सा अपनापन आए
        ये लोग रहें सच्चे मन से, क्यों कर कोई नक्काल रहे
        बस यही दुआ हम करते हैं  सबसे बेहतर ये  साल रहे।
        दुनिया में प्रेम रहे जि़दा, नफ़रत की कोई ना धारा हो,
        ये देश हमे प्यारा लेकिन सारा संसार हमारा हो
        ही दुआ हम करते हैं  सबसे बेहतर ये साल रहे
        हम सही राह के राही हों, सबको नव राह दिखाएँगे,
        जो भटक रहे है उन सबको, हम बार-बार समझाएँगे।
        जीवन हो एक सीधा रस्ता, क्यों अपनी टेढ़ी चाल रहे।
        बस यही दुआ हम करते हैं सबसे बेहतर ये  साल रहे।
 सम्पर्क:  संपादक, सद्भावना दर्पण (मासिक), 28 प्रथम तल, एकात्म परिसर, रजबंधा मैदान रायपुर. छत्तीसगढ़. 492001
मो. 09425212720  पूर्व सदस्य, साहित्य अकादमी, नई दिल्ली (2008-2012)छ: उपन्यास, बारह व्यंग्य संग्रह सहित बयालीस पुस्तके प्रकाशित, Email-girishpankaj1@gmail.com

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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