October 22, 2013

कविता

दीपावली चार कविताएँ
- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु´
1. उजाले
उम्र भर रहते नहीं हैं
संग में सबके उजाले।
हैसियत पहचानते हैं
ज़िन्दगी के दौर काले।
तुम थके हो मान लेते-
हैं सफ़र यह जि़न्दगी का।
रोकता रस्ता न कोई
प्यार का या बन्दगी का।
हैं यहीं मुस्कान मन की
हैं यहीं पर दर्द-छाले।
तुम हँसोगे ये अँधेरा,
दूर होता जाएगा।
तुम हँसोगे रास्ता भी
गाएगा मुस्कराएगा।
बैठना मत मोड़ पर तू
दीप देहरी पर जलाले।
2. उजियार बहुत है
दूर  उजालों  की बस्ती है
पथ में भी अँधियार बहुत है।
नफ़रत नागफनी बन फैली
पग-पग हाहाकार बहुत है।
फिर भी ज़िन्दा है मानवता
क्योंकि जग में प्यार बहुत है।
अँधियारे  से आगे  देखो
सूरज है, उजियार बहुत है।
काँटों के जंगल से आगे
खुशबू-भरी बयार बहुत है।
दीवारें मत खड़ी करो तुम
पहले से दीवार बहुत हैं।
नहीं गगन छू पाए तो क्या
मन का ही विस्तार बहुत है।
पूजा करना भूल गए तो
छोटा-सा उपकार बहुत है।
 3. दीप तुम ऐसे जलाना
मन का अँधेरा दूर कर दे
हर घर में उजियार भर दे
    दीप तुम ऐसे जलाना।
प्यार का संसार फैले
आँगन गली हर द्वार फैले।
    दीप तुम ऐसे जलाना।
छल-कपट  का हर बन्ध टूटे
नफ़रतों का सब खेल छूटे
 दीप तुम ऐसे जलाना।
दीप नयनों के झिलमिलाएँ,
 मन और आँगन खिलखिलाएँ
      दीप तुम ऐसे जलाना।
विश्वास का वातावरण हो
प्रेम का ही हर आचरण हो
    दीप तुम ऐसे जलाना।
जो सभी अभाव दूर कर दे
अज्ञान का गर्व चूर कर दे
    दीप तुम ऐसे जलाना।
4. दिया जलता रहे
यह जि़न्दगी का कारवाँ,
इस तरह चलता रहे।
हर देहरी पर अँधेरों-में
दिया जलता रहे॥
आदमी है आदमी तब,
जब अँधेरों से लड़े।
रोशनी बनकर सदा,
सुनसान पथ पर भी बढ़े॥
भोर मन का  हारता कब,
घोर काली रात से।
न आस्था के दीप डरते,
आँधियों के घात से॥
मंज़िलें उसको मिलेंगी
जो निराशा से लड़े,
चाँद- सूरज की तरह,
उगता रहे ढलता रहे।
जब हम आगे बढ़ेंगे,
आस की बाती जलाकर।
तारों -भरा आसमाँ,
उतर आएगा धरा पर॥
आँख में आँसू नहीं होंगे
किसी भी द्वार के।
और आँगन में खिलेंगे,
सुमन समता- प्यार के॥
वैर के विद्वेष के कभी
 शूल पथ में न उगें,
धरा से आकाश तक
बस प्यार ही पलता रहे।

सम्पर्क: फ्लैट न-76,( दिल्ली सरकार आवासीय परिसर)रोहिणी सैक्टर -11 , नई दिल्ली-110085

4 Comments:

Anita (अनिता) said...

आदरणीय हिमांशु भैया जी की सभी कविताएँ बहुत ही सुंदर संदेश लिए हुए दिल में उतर गयीं!
काश! ऐसे हर कोई सोच ले तो किसी की देहरी पर, किसी के दिल में कभी अँधेरे टिक न पाएँगे! हर दिल में बस उजियारा ही उजियारा होगा!

~सादर
अनिता ललित

manukavya said...

उम्र भर रहते नहीं हैं, संग में सबके उजाले …… दूर उजालों कि बस्ती है, पथ में भी अंधियार बहुत है …… अंधियारे से आगे देखो सूरज है उजियार बहुत है …… नहीं गगन छू पाये तो क्या मन का ही विस्तार बहुत है …… आदमी है आदमी तब, जब अंधेरों से लड़े …… सब एक से बढ़ कर एक …… ये भाव, ये पंक्तियाँ अपने में पूरा जीवन दर्शन समाये हुए हैं … बस जरूरत है तो इसे समझ कर इसको अमल में लाने की .... रौशनी के पैगाम के साथ दीवाली कि हार्दिक शुभकामनायें !

मंजु मिश्रा

manukavya said...

उम्र भर रहते नहीं हैं, संग में सबके उजाले …… दूर उजालों कि बस्ती है, पथ में भी अंधियार बहुत है …… अंधियारे से आगे देखो सूरज है उजियार बहुत है …… नहीं गगन छू पाये तो क्या मन का ही विस्तार बहुत है …… आदमी है आदमी तब, जब अंधेरों से लड़े …… सब एक से बढ़ कर एक …… ये भाव, ये पंक्तियाँ अपने में पूरा जीवन दर्शन समाये हुए हैं … बस जरूरत है तो इसे समझ कर इसको अमल में लाने की .... रौशनी के पैगाम के साथ दीवाली कि हार्दिक शुभकामनायें !

मंजु मिश्रा

pardeepsharma said...

भाईसाहब, आपके उन्नत विचारों से परिपूर्ण कविताएं !!.ये सभी कविताएं हृदय -परिवर्तन करने की क्षमता रखती हैं......

ज्योत्स्ना प्रदीप

लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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