February 21, 2013

कविता



वसंतागमन
-साधना वैद
हर वसंत पर जब
नवयौवना धरा
इठला कर
कोमल दूर्वादल से
अपने अंग-अंग में
पीली सरसों का उबटन लगा
अपनी धानी चूनर को
हवा में लहराती है
किसी का भी मन
चंचल हो जाता है !
सुबह-सुबह ओस की
नन्हीं-नन्हीं बूँदों से
आच्छादित उसका
सद्यःस्नात भीगा बदन
मन को सहसा
आलोडित कर
झकझोर कर जगा देता है
और प्रार्थना के स्वर
स्वत: ही अधरों से
फूट पड़ते हैं।
प्रिय मिलन की आस में
उल्लसित हो
अधीर धरा ने
नव कुसुमित बेला मोगरा
चम्पा चमेली की
वेणी से अपने केशों को
सजा लिया है! 
माँग में हरसिंगार का टीका
गूँथ कर पहन लिया है!
अपने सुन्दर सुडौल तन पर
तरह-तरह के रंग बिरंगे
सुरभित सुमनों के
मनमोहक गहनों को 
बड़ी कलात्मकता से
सजा लिया है।
ठीक वैसे ही जैसे
दुष्यंत के आगमन की सूचना पा
शकुन्तला स्वयं को
सजा लिया करती थी।
हथेलियों में मेंहदी के
सुन्दर बूटे रचा लिये हैं
तो पैरों में भी 
चाँदनी के फूलों की पाजेब
छनछना रही है। 
सुर्ख गुड़हल के अर्क का
आलता पाँवों की शोभा को
द्विगुणित कर रहा है।
धरा- वधू की यह साज सज्जा 
संध्या की बेला में आने वाले
अपने परदेसी प्रियतम के
स्वागत के लिए है।
सुदूर गगन में
सारे संसार की सैर कर
थके हारे भुवन भास्कर
जब अपनी प्रियतमा से मिलने
आकाश की ऊँचाइयों से
क्षितिज की सीमा रेखा पर
उतर कर नीचे आते हैं
उनकी अभ्यर्थना के लिये
सारे पलाश और गुलमोहर
हज़ारों दीप प्रज्ज्वलित कर
आरती का थाल हाथों में लिये
मंथर गति से झूमने लगते हैं।
और प्रियतम के गले में
वरमाल डालने को उत्सुक
धरा वधू के
सलज्ज मुख को                       
एक सिंदूरी आभा
रक्ताभ कर जाती है!
दूर व्योम के पार अब
अनुरक्त दिवाकर अपनी
प्रियतमा को बाहुपाश में
बाँधने के लिये
धरा की सतह तक
उतर आये हैं।
मधुमास की इस ऋतु में
मदन के बाणों से घायल हो 
प्रकृति भी पूरी तरह से
वासंती रंग में
रंग गई है और
उसका यह अभिसार
हज़ारों प्रणयी हृदयों के
तारों को छेड़ कर
तरंगित कर जाता है!
संपर्क: 33/23, Adarsh Nagar, Rakab Ganj, Agra U.P. Pin- 282001, E-mail sadhana.vaid@gmail.com, http://sudhinama.blogspot.com

1 Comment:

Sadhana Vaid said...

अपनी रचना को यहाँ देख हर्षित हूँ ! साभार !

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

-0-

लेखकों सेः उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष