October 26, 2012

इस बार भी स्त्री



इस बार भी स्त्री
- श्री देवी
कितना मुश्किल है,
स्त्री बनकर जीना।
हर बार प्रियतम की अपेक्षाओं में,
अपनी खुशियाँ ढूँढऩा।
जब वह चाहे तब प्यार करे,
जब वह चाहे तब बात करे।
एक कठपुतली जिसमें स्पंदन आये,
जब दुनिया चाहे।
कुछ भी उम्मीद न करे किसी से,
न साथी से न जिंदगी से ।
बस जीती रहे, उनकी उम्मीदों को।
जो उसके अपने नहीं है।
दूसरों की इच्छा पर निर्भर,
और इस इंतजार में,
एक नजर दुलार भरी।
गुजर जाती हैं रातें, और जिंदगी भी,
बिना किसी शिकायत के।
और फिर एक जनम,
इस बार भी 'स्त्री

3 Comments:

vandan gupta said...

स्त्री होने की त्रासदी का सुन्दर चित्रण्।

dinesh gautam said...

स्त्री होना त्रासद तो नहीं पर ज़्यादातर हमारी सामाजिक स्थितियाँ और अंतर्वैयक्तिक संबंधों की असफलताएँ ज़रूर हमें ऐसा अहसास करवाती हैं। कई बार सचमुच वह त्रासद भी हो जाता है। इससे भी इन्कार नहीं ।

राजेश उत्‍साही said...

सच जो यह है कि स्‍त्री को इतने संकुचित दायरे में देखना ठीक नहीं है। स्‍त्री केवल प्रियतम भर के लिए नहीं होती है। स्‍त्री का अपना अस्तित्‍व है। दिनेश जी बात से मैं सहमत हूं।
*

यहां यह भी प्रतीत हो रहा है कि लेखिका जैसे कुछ कहते-कहते रूक गई है। कविता आरंभ तो हुई पर अपने चरम पर नहीं पहुंची।

श्री देवी को अपनी इस कविता पर फिर से काम करना चाहिए।
बहरहाल उनकी अभिव्‍यक्ति को आपने जगह दी। यह अच्‍छी बात है1

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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