March 21, 2011

रंग -बिरंगी दुनिया

दुनिया का सबसे बड़ा परिवार 
एक छत के नीचे 181 सदस्य
जियोना ने इतनी शादियां की है कि कई बार वे खुद इसकी गिनती भुल जाते हैं। उन्होंने 50 बार शादियां की हैं और 109 बच्चे पैदा किए हैं। पर्वतीय परिवेश में स्थित गांव बक्तवंग के इस मुखिया को अपने ऊपर गर्व है।
आपको सुनकर आश्चर्य होगा कि पूर्वी राज्य मिजोरम में दुनिया का सबसे बड़ा एक ऐसा परिवार निवास करता है जिसमें परिवार के मुखिया की 39 पत्नियां, 94 बच्चे, 33 पोते-पोतियां हैं। परिवार का मुखिया जिओना चाना है। यह भरा पूरा परिवार एक ही छत के नीचे रहता है। चाना की 14 बहुएं भी हैं। परिवार के सदस्यों की कुल संख्या 181 है।
सुनने में किस्सा सी लगने वाली जिंदगी की यह असली कहानी है। मिजोरम के उत्तरी हिस्से में बक्तावंग से लगभग 100 किलोमीटर दूर एक छोटा सा गांव है। इसी गांव में जिओना चाना रहते हैं। चाना, चाना इसलिए हैं क्योंकि यह उनके कबीले का नाम है। और जिओना इस कबीले के प्रमुख हैं।
चाना कबीले में एक से ज्यादा विवाह की परंपरा है। अब एक से ज्यादा का मतलब दो, चार, छह कुछ भी हो सकता है। तो जिओना इसके मतलब को बढ़ाकर 39 तक ले जा चुके हैं। शादी हुई तो बच्चे भी हुए। ज्यादा शादियां हुईं तो बच्चे ज्यादा हो गए। इस तरह बच्चों की तादाद 94 तक पहुंच गई । फिलहाल इन बच्चों की जितनी शादियां हुईं (कितनी, इसका पता नहीं है), उनसे 33 बच्चे हो चुके हैं। यानी चाना के 33 पोते- पोतियां। जियोना ने इतनी शादियां की है कि कई बार वे खुद इसकी गिनती भुल जाते हैं। उन्होंने 50 बार शादियां की हैं और 109 बच्चे पैदा किए हैं। पर्वतीय परिवेश में स्थित गांव बक्तवंग के इस मुखिया को अपने ऊपर गर्व है।
यह परिवार एक विशेष धार्मिक पंथ का अनुयायी है। यह परिवार ललपा कोहरन पंथ को मानता है। कहा जाता है कि जियोना के पिता चाना ने भी 20 से अधिक शादियां की थी। उनके निधन के बाद उनके पुत्र जियोना ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। अपने पिता की तरह जियोना भी अपने परिवार के सदस्यों के आध्यात्मिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन पर नियंत्रण रखते हैं।
नई पीढ़ी का आशियाना
इतना बड़ा परिवार है और संयुक्त है, तो घर भी बड़ा चाहिए. चाना मुखिया जिओना के पास जैसे शादी करने के लिए दिल बड़ा है, वैसे ही पत्नियों को रखने के लिए घर भी काफी बड़ा है। उनके घर में 100 कमरे हैं। चार मंजिल के इस घर का नाम उन्होंने रखा है छुआन थाट रन यानी नई पीढ़ी का आशियाना।
समुदाय में परंपरा
चाना का अपना अलग कमरा है, जबकि उनकी पत्नियों के लिए एक बड़ा शयनकक्ष है। चाना के साथ रहने के लिए
परिक्रमण विधि का इस्तेमाल किया जाता है। समुदाय में 4000 सदस्य हैं, इसे जीवित रखने की जिद से जियोना का परिवार इतना विशाल हो गया। खबर तो यह भी है कि जियोना को आज भी नई पत्नी की तलाश जारी है।
भाग्यशाली हूं मैं
जिओना अपने इस भरे पूरे परिवार से बेहद खुश हैं। और जो दलील अक्सर हिंदी फिल्मों में सुनने को मिलती है कि बच्चे तो भगवान की देन हैं, उसे जिओना ने पूरे दिल से स्वीकार करते हुए अपने परिवार की जिम्मेदारी भी भगवान पर डाल दी है। वह कहते हैं, मुझे तो लगता है कि मैं ईश्वर का विशेष बालक हूं। उसने मुझे इतने सारे लोगों की देखभाल का काम सौंपा है। 39 पत्नियों का पति होना और दुनिया के सबसे बड़े परिवार का मुखिया होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।
सबके लिए एक रसोई
इनके परिवार के आकार को देखकर कुछ व्यवहारिक सवाल मन में उठना लाजमी है। मसलन वे लोग खाना कहां और कैसे खाते हैं? परिवार के लोग रहते भले ही अलग- अलग कमरों में हों, लेकिन संयुक्त परिवार की सभी शर्तों को पूरा करते हुए सबका खाना एक ही रसोई में बनता है। रोज रात के खाने में 30 मुर्गे, 60 किग्रा आलू और 99 किग्रा चावल का प्रयोग होता है। सबसे बड़ी पत्नी थाजियांगी अनुशासन बनाए रखती है।
शादी का प्रस्ताव
चाना की 35 वर्षीय पत्नी रिंकमिनी कहती हैं- जियोना गांव के सबसे खूबसूरत व्यक्ति हैं। 18 साल पहले एक सुबह सैर के समय उन्होंने मुझे देखा और मुझे शादी का प्रस्ताव भेजा।
एकता का राज
एक अन्य पत्नी कहती है- आपसी प्रेम व सम्मान ही परिवार की एकता का राज है।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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