October 23, 2010

120 साल से घर की हर चीज सलामत!

हम सबको अपनी पुरानी चीजों से प्रेम होता है और हम उन्हें अपने जीते जी संजो कर रखना चाहते हैं। लेकिन हमारी उन प्रिय वस्तुओं को हमारे जाने के बाद पीढ़ी दर पीढ़ी बच्चे भी संजो कर रखें ऐसा बहुत ही कम होता है, लेकिन आपको जानकर ताज्जुब होगा कि इंग्लैंड के ससेक्स में एक ऐसा घर हैं जहां 120 वर्ष पुरानी जीचें आज भी सिर्फ संजो कर रखी गईं हैं बल्कि उनका इस्तेमाल भी होता है।
साउथ ईस्ट इंग्लैंड की ऐतिहासिक जगह ससेक्स में बने हेनकॉक्स नामक एक घर में पिछले 120 साल से एक भी चीज नहीं फेंकी गई है। हेनकॉक्स में रह रहीं 50 वर्षीय शेरलॉट मूर कहती हैं, 'इस घर में हमारी पांच पीढिय़ों ने अपनी जिंदगी बिताई है और हर पीढ़ी ने यहां के यूनीक कलेक्शन में अपना योगदान दिया है।' अपने तीन बेटों जॉर्ज, सैम और जेक के साथ यहां रह रही मूर कहती हैं, 'आज से 20 साल पहले जब लंदन से अपनी नौकरी छोड़कर आई थी, तो मेरी मां ने मुझे इस घर की जिम्मेदारी सौंपी थी। हालांकि अब यह घर बहुत ही पुराना और आउटडेटेड हो चुका है और हमारे पास यह ऑप्शन भी है कि हम इसे नए सिरे से मॉडर्न तरीके से बनाएं, लेकिन हम अपने बुजुर्गो की इस निशानी को ऐसे ही संजोए रखना चाहते हैं। यहां तक कि मेरे बच्चों को भी इसमें रहना बहुत पसंद है। हम अपने बुजुर्गो के फर्नीचर का इस्तेमाल करते हैं, उनकी किताबें पढ़ते हैं, उनकी क्रॉकरी का इस्तेमाल करते हैं और यहां तक कि हम उन्हीं की बेडशीट्स भी बिछाते हैं।'
पर्दे भी सदी पुराने
इस घर में पर्दे भी उसी समय के लगे हुए हैं और यहां तक कि अब तक रसोई की कबर्ड पर तीन डिजिट वाले कुछ टेलीफोन नंबर्स लिखे हुए हैं। इनमें कुछ नंबर्स तो बेकर और नर्स के हैं।
यह घर मूर की परदादी मिलीसेंट को अनाथ होने के बाद 1880 के दशक में कानूनी रूप से मिला था, जिसे शादी के बाद भी उन्होंने नहीं छोड़ा। उनके पति डॉक्टर थे और द रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियन के प्रेसिडेंट थे। मिलिसेंट का बेटा भी डॉक्टर था। घर के सभी सदस्य पढ़े-लिखे होने के नाते अक्सर डायरी लिखा करते थे, जो आज भी उस घर में मौजूद हैं। उन्हीं खतों से यह भी पता चलता है कि यहां छह नौकर भी हुआ करते थे। घर के फायर प्लेस में लकडिय़ों के अवशेष भी अब तक मौजूद हैं। मूर बताती हैं, 'यह अवशेष मेरे जन्म लेने से भी पहले के हैं।' खास बात यह भी है कि इस घर में रहने वाली हर फैमिली ने अपना एक न एक सदस्य किसी न किसी जंग में खोया है।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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