January 19, 2009

आपके पत्र

एक कहानी को भी स्थान दें

नवंबर माह की उदंती.com । पत्रिका की सुन्दर कलात्मक छपाई उसका प्रस्तुतीकरण बहुत सुन्दर है मेरी बधाई स्वीकार करें। इस का कलापक्ष सोनाबाई की कलाकृतियां, फीचर, लेख सभी पठनीय हैं। छत्तीसगढ़ का इतना अच्छा प्रस्तुतीकरण अब तक नहीं देखा। मेरी कामना है उदंती इसी प्रकार उन्नत होती रहे एक सुझाव है यदि हो सके तो एक कहानी को भी स्थान दे।

-आशा भाटी, इंदिरा नगर, लखनऊ

पहल तो करनी होगी

सही कहा आपने पहल तो करनी ही होगी। सबसे अच्छी पहल वही होती जो खुद से की जाएं। जिस व्यवहार से हमें तकलीफ होती है वो व्यवहार हमें नहीं करना है। बस हो गई पहल। ट्रेफिक रुल्स का पालन करना खुद से की शुरु करें।

-अंजीव पांडे, रायपुर से

0 आपने सही कहा किसी को तो पहल करनी होगी । यह एक अच्छा प्रयास है और ऐसी बत्तमीजियां मैंने भी देखी है आपका गुस्सा जायज है !!

-दीपक, कुवैत से
मन को मोह लेता है

मेरे पास इस समय नेट पत्रिका और प्रकाशित दोनों पत्रिका सामने है। ऐसी पत्रिका मैंने कम से कम भारत में और अपने जीवन में नहीं देखी। साज- सज्जा तो मन को मोह लेता है, सामग्री का चयन साबित करता है। मुझे दुख होता रहेगा कि क्योंकर मैं इसमें पहले नहीं छपा। साधुवाद।

- जयप्रकाश मानस, संपादक सृजनगाथा, रायपुर से


मुस्कुराता हुआ गुलाब का फूल

नवंबर अंक का मुख पृष्ठ अपने कला पक्ष के लिए अद्वीतीय तो है ही, पत्रिका को हाथ में लेते ही ताजे खिले मुस्कुराते हुए गुलाब के फूल का अहसास होता है। भीतर के पृष्ठों में अंक संयोजन काबीले तारीफ है। रचनाएं इस बात की ओर इंगित करती हैं कि किसी कलाकार ने पूरी पत्रिका को मन से गढ़ा है। बधाई।

- रोशनी मेहता, दिल्ली से

छत्तीसगढ़ की संस्कृति और तहजीब

धन्य है वो माटी

सर्वप्रथम आप को बधाई इतनी सुंदर पत्रिका के प्रकाशन के लिए! नवंबर अंक में सोनाबाई से लिया गया साक्षात्कार पढ़ा ! धन्य है वो माटी जिसमें उस जैसी कलाकारा पैदा हुई जिसकी माटी ने उसकी माटी को भी बदल डाला! किसी भी देश की पहचान उसकी संस्कृति, उसकी रहन-सहन उसके रीति रिवाज होते हैं!

छत्तीसगढ़ तो अपने आप में अपनी ही नहीं बल्कि भारत की संस्कृति उसके तहजीब के लिए पूरे संसार में जानी जाती है! आप का वार्तालाप जिस तरह से और जिन बारिकियों को उभार के लाया है साथ में बड़े सरल एवम् मार्मिक तरीके से जिन अनछुए पहलुओं को आप ने छुवा वह भी तारीफे काबिल है। यह लेख आनेवाली पीढ़ी के लिए एक रचनात्मक काम करेगा! बहुत अच्छा लगा पत्रिका को पढक़र। आभार ।

-पराशर गौर, कनाडा से

1 Comment:

Raj Tamrakar said...

A wonderful magzine on Chhattisgarh. My wishes and compliments for the Chhattisgarhies and the magzine.....raj tamrakar, Bangalore

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

-0-

लेखकों सेः उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष