उदंती.com को आपका सहयोग निरंतर मिल रहा है। कृपया उदंती की रचनाओँ पर अपनी टिप्पणी पोस्ट करके हमें प्रोत्साहित करें। आपकी मौलिक रचनाओं का स्वागत है। धन्यवाद।

Jun 1, 2024

कविताः उसकी चुप्पी

  -  डॉ.  कविता भट्ट ‘शैलपुत्री’






उसकी चुप्पी- 

मेरे भीतर उतर आई हो 

कहीं जैसे; 

करने को आतुर हों 

अनन्त यात्रा 

मेरी आत्मा तक 

उसकी आँखें 

यों देख रही हैं 

एकटक मुझे 

भीतर से भीतर तक 

अभी तो स्पर्श भी न किया

 फिर ये कैसा जादू है।

3 comments:

Anonymous said...

सुंदर अभिव्यक्ति। सुदर्शन रत्नाकर

प्रियंका गुप्ता said...

इस प्यारी सी कविता के लिए बहुत बधाई

Krishna said...

बहुत सुंदर कविता...हार्दिक बधाई।
कृष्णा वर्मा