November 03, 2020

प्रेरक- दिन की शुरुआत किस काम से करनी चाहिए?

-निशांत

भूतपूर्व अमेरिकी नौसेना एडमिरल और नेवी सील प्रशिक्षक विलियम एच.मैक्. रेवन ने 2014 में टैक्सास यूनिवर्सिटी में यह शानदार स्पीच दी।

इस स्पीच का एक रोमांचक अंश मैं आपके सामने प्रस्तुत करना चाहता हूँ, जिससे उन्होंने अपने श्रोताओं को प्रेरणा और प्रोत्साहन दियाः

-यदि तुम दुनिया को बदलना चाहते हो तो इसकी शुरुआत अपना बिस्तर जमाने से करो।

-सुबह उठने के बाद यदि तुम अपने बिस्तर को जमा लोगे तो तुम दिन की शुरुआत एक काम को पूरा करने से करोगे।

-यह कर लेने पर तुम्हें छोटी ही सही लेकिन गौरव की अनुभूति होगी। यह अनुभूति तुम्हें किसी दूसरे काम को पूरा करने के लिए प्रेरित करेगी, फिर किसी और काम को

-दिन के समाप्त होने तक वह एक पूरा काम कई कामों को पूरा करने में बदल चुका होगा।

-बिस्तर समेटने का छोटा सा काम तुम्हें यह महसूस कराएगा कि ज़िंदगी में छोटी-छोटी बातें बड़ा महत्त्व रखती हैं।

-यदि तुम छोटे-छोटे काम सही से नहीं कर सकते तो तुम बड़े-बड़े काम ठीक से कभी नहीं कर पाओगे।

-यदि दुर्भाग्यवश तुम्हारा दिन बहुत बुरा बीते तो घर लौटने पर करीने से जमा हुआ बिस्तर तुम्हें बेहतर महसूस कराएगा। इसे तुमने ही बनाया था।

-जमा हुआ वह बिस्तर तुम्हें प्रेरित करेगा, तुम्हें कहेगा कि आनेवाला कल यकीनन बेहतर होगा।

स्पीच को सुन रहे अधिकांश श्रोता यह सब सुनकर हँस रहे थे। बिस्तर जमाने से दुनिया बदलेगीयह कोई मजाक है क्या?

नहीं। यह मजाक नहीं है। एडमिरल की इन सीधी-सादी मजाकिया सी लगनेवाली बातों में गहरा संदेश छुपा है।

उन्होंने ये बातें अपने गहरे ज्ञान और विशाल अनुभव के आधार पर कही थीं, जो उन्हें वर्षों तक बेहद कठोर नेवी सील ट्रेनिंग से मिला था।

जीवन के संबंध में ये बातें पूर्ण सत्य हैं। यदि हम छोटी चीजें सही तरीके से नहीं कर सकते तो जीवन की विशाल समस्याओं, तकलीफों और चुनौतियों का सामना हम कैसे करेंगे?

हमें छोटे-छोटे काम कुशलता और परिपूर्णता के साथ करने की कोशिश करनी चाहिए। यदि हम छोटे-छोटे काम बहुत अच्छे से करेंगे तो हम दूसरे लोगों से बहुत आगे निकल जाएँगे।

आपको बहुत महत्त्वाकांक्षी होने की कोई ज़रूरत नहीं है। छोटे काम या छोटी चीजों पर पूरा फोकस करके छोटी सफलता अर्जित कीजिए और समय को व्यर्थ करने वाली दूसरी छोटी चीज़ों को नजरअंदाज़ करते जाइए।

छोटे-छोटे लक्ष्य प्राप्त करने पर आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा। धीरे-धीरे आप खुद पर और अधिक यकीन करने लगेंगे और बड़े लक्ष्यों तक पहुँचने में आपका हौसला पस्त नहीं होगा।

हमारी रोज़मर्रा की छोटी सफलताएँ एकजुट होकर बड़ी सफलता बनेंगी। अपने लक्ष्य को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर आप उन्हें एक-के-बाद-एक हासिल कर सकते हैं।

जीवन को रूपांतरित कर देने वाले एडमिरल के ये प्रेरणादायी शब्द रोम-रोम को झकझोर देते हैं। (हिन्दी ज़ेन से)

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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