May 15, 2020

सपनों के गुलमोहर

सपनों के गुलमोहर
-कमल कपूर
अमेरिका से तीन माह बाद लौटी रश्मि, पति रवि के साथ कदमताल करते हुए एयरपोर्ट से निकल कर ‘पार्किंग-लॉट’ में पहुँची तो रवि को एक नई चमचमाती उजली ‘इनोवा’ का दरवाजा खोलते देख चौंकी लेकिन प्रफुल्लित नहीं हुई, अपितु मुर्झा गई ।
‘‘तो इनोवा ले ली? मतलब मेरे गुलमोहर कटवा दिये?’’ बुझे स्वर में पूछा उसने।
‘‘ये बातें बाद में…. अभी तो इस महारानी की सवारी का लुत्फ़ उठाओ। पता है सड़कों पर यूँ फिसलती है ज्यों मानसरोवर में राजहंस तैरता है । ‘हाय री मेरे सपनों की गाड़ी’ मुस्कुराते हुए कहा उसने और रश्मि को उसकी मुस्कान जहर-सी लगी ।’’
‘‘और मेरे सपनों की फसल का क्या?’’ एक ठंडी लंबी साँस लेते हुए रश्मि ने कहा और पलकें मूँदकर दर्द पीने की कोशिश करती हुई अतीत में खोने लगी….
…. बरसों पहले बड़े अरमान से घर के पिछले आँगन में उसने दो शिशु-गुलमोहर रोपे थे, यह सोच कर कि कम से कम एक को तो मिट्टी अपना ही लेगी पर उदार मिट्टी ने दोनों को अपना लिया और दोनों साथ-साथ ही बड़े होकर, एक दिन सुर्ख गुलाल से फूलों से लद गए । उसकी ललछौंही छाँव में बैठ कर कितने ही काम निपटाती थी वह। बच्चों के अनुराग से बरसते थे वो रेशमी, नर्म, फूल उस पर। उसके सुख की निरंतरता में बाधा पड़ी…. अभी कुछ महीने पहले रवि ने रट लगा ली थी कि पुरानी गाड़ी बेच कर वह नई ‘इनोवा’ लेंगे पर उससे पहले गुलमोहर कटवाकर गैरेज़ बनवाएँगे, ताकि उनसे झरने वाले फूल-पत्ते और पक्षियों की बीट गाड़ी को खराब न कर सकें। रश्मि जमकर विरोध करती रही , पर उसे बड़ी बिटिया पुरवा के पास तीन महीने के लिए अमेरिका जाना पड़ा और पीछे से रवि ने मनमानी कर ही ली ।
गाड़ी घर के सामने रुकी और वह झटके से बाहर निकली तो छोटी बिटिया प्राची आ कर माधवी-लता-सी उसके गले से लिपट गई, ‘‘मम्मा! आपके लिए सरप्राइज़ है ।’’
‘‘जानती हूँ…. उसी पर सवार हो कर तो आई हूँ,’’ कसैले स्वर में कह वह उसे परे करते हुए पिछले आँगन में पहुँची…. यह क्या? अबीरी-फूलों की आभा बिखेरते उसके दोनों गुलमोहर सिर जोड़े खड़े मुस्कुरा रहे थे और उनके आसपास एक संगमरमरी चबूतरा भी बनवा दिया था । चार हाथ की दूरी पर सफ़ेद नीली पॉली-शीट का बना एक सुंदर कार-शेड भी जैसे उसका स्वागत कर रहा था…. उसी पल प्राची और रवि भी सामने आ कर खड़े हो गए और उसने एक साथ दोनों को बाहों में भर लिया ।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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