July 25, 2017

तीन लघुकथाएँ:

 -डॉ. सुषमा गुप्ता

1 ब्रेकिंग न्यूज़
'साहब ये तो मर चुका है। बुरी तरह जल गई है बॉडी। और कार भी बिल्कुल कोयला हो रखी है। आग तो भीषण ही लगी होगी।  ’कॉन्स्टेबल रामलाल अपने इंस्पैक्टर साहब से हताश सा बोला। बहुत भयानक बदबू फैली थी माँस जलने की। वो बदबू से बेहोश होने का था। फिर भी बड़ी हिम्मत से उसने जाँच की।
'अरे पूछ तो रामलाल आसपास के लोगों से कुछ देखा इन्होंने?’ इंस्पैक्टर साहब गरज के बोले।
भीड़ में से एक आदमी बोला। 'सर कुछ क्या सबकुछ देखा। 10 मिनटों में तो पूरी तरह से सब जल कर राख हो गया। हम पाँचों यहीं थे तब।
'आप क्या कर रहें थे पाँचों यहाँ। आपने कोशिश नहीं की आग बुझाने की?’
'सर हम आग कैसे बुझाते?’
'तो आप सब खड़े देखते रहे?’
'नही सर हमनेंवीडियो बनाई है न । अलग अलग ऐंगल से,
ताकि मीडिया दिखा सके कि ये हुआ कैसे।
 2 मानसिक संतुलन
बहुत साल बंद रही वह एक अंधेरी कोठरी में। फिर शायद प्रभु को दया आ गई। आ पहुँचे कुछ समाजसेवी और चंद पुलिसकर्मी और बंद करा दिया वह चकला। पर 'वहहाँ 'वहअब उसका कोई नाम नहीं बचा। कोई पहचान वाला भी नहीं मिला उसका या किसी ने पहचानना नहीं चाहा ये तो भगवान जाने। वह खुद कुछ बताने की हालत में नहीं रही थी। मानसिक संतुलन खो चुकी थी। हमारे देश के दयालु कानून ने उसे एक आशा किरण नाम के मैंटलअसयालम (एक इज्जत वाला नाम पागलखाने का) में भेज दिया। बहुत सारे कर्मचारी थे वहाँ उसका ध्यान रखने को।
'वहनहाती भी खुले में थी उसका मानसिक संतुलन ठीक नहीं था न। और बाकी सब कर्मचारी बहुत ध्यान से उसे देखते थे ,क्योंकि उनका मानसिक संतुलन बिल्कुल ठीक था। और एक दिन 'वोयूँ ही मर गई।रिपोर्ट में लिखा गया उसका पैर फिसलने से सर फट गया।

3 राजनीति
'अबे तूने ये क्या तमाशा लगाया है। हिंदुस्तान मुर्दाबाद, पाकिस्तान जिंदाबाद?’ राहुल ने यूनिवर्सिटी कैम्पस में भीड़ देख मोहन से पूछा।
मोहन फुसफुसा के बोला 'कुछ नहीं यार तू तो जानता है मुझे राजनीति में जाना है। कई साल से देशभक्ति के नारे लगा रहा हूँ कोई ध्यान ही नही देता। आज जरा पाकिस्तान जिंदाबाद क्या बोला, तू सामने भीड़ देख। और तो और मीडिया वाले भी जमघट लगाएँ है।
'अबे गधे जेल जाएगा।
'गधा होगा तू। इतनी सी बात तेरी समझ नही आ रही जेल जाते ही हीरो बन जाऊँगा। सब अखबारों में छा जाऊँगा । फिर अपनी बात से पलट जाऊँगा। बेरोजगारी की झुंझलाहट का जामा पहनाऊँगा और किसी न किसी बड़ी पार्टी का टिकट पा जाऊंगा। अब हट साइड में। टाइम मत खराब कर।हिंदुस्तान मुर्दाबाद, पाकिस्तान जिंदाबाद।

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लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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