January 28, 2017

प्रेरक

          आलू, अंडे और कॉफी  
बुरे दिनों के दौरान एक बेटी ने अपने पिता से कहा, ‘ये समय कितना कठिन है! मैं अब बहुत थक गई हूँ, भीतर-ही-भीतर टूट गई हूँ, जब तक हम एक मुसीबत से दो-चार होते हैं तब तक नई मुसीबतें मुँह बाए खड़ी हो जाती हैं। ऐसा कब तक चलेगा?’
पिता किसी जगह खाना बनाने का काम करता था। वह बिना कुछ बोले उठा और उसने सामने रखे चूल्हे पर तीन बर्तनों में पानी भरकर तेज आँच पर चढ़ा दिया।
जब पानी उबलने लगा, उसने एक बर्तन में आलू, दूसरे में अंडे, और तीसरे बर्तन में कॉफ़ी के बीज डाल दिए. फिर वह चुपचाप अपनी कुर्सी तक आकर बेटी की बातें सुनने लगा। वह वाकई बहुत दु:खी थी और यह समझ नहीं पा रही थी कि पिता क्या कर रहे हैं।
कुछ देर बाद पिता ने बर्नर बंद कर दिए और आलू और अंडे को निकालकर एक प्लेट में रख दिया और एक कप में कॉफ़ी ढाल दी। फिर उसने अपनी बेटी से कहा:
अब तुम बताओ कि ये सब क्या है?’
बेटी ने कहा, ‘आलू, अंडे और कॉफ़ी ही तो है। और क्या है?’
नहीं, इन्हें करीब से देखो, छूकर देखो’, पिता ने कहा।
बेटी ने आलू को उठाकर देखा, वे नरम हो गए थे। अंडा पानी में उबलने पर सख्त हो गया था और कॉफ़ी से तरोताज़ा कर देने वाली महक उठ रही थी।
लेकिन मैं समझी नहीं कि आप क्या बताना चाह रहे हैं’, उसने कहा।
पिता ने उसे समझाया, ‘मैंने आलू, अंडे और कॉफ़ी को एक जैसी यंत्रणा यानी खौलते पानी से गुज़ारा, लेकिन इनमें से हर एक ने उसका सामना अपनी तरह से किया। आलू पहले तो कठोर और मजबूत थे, लेकिन खौलते पानी का सामना करने पर वे नर्म-मुलायम हो गए. वहीं दूसरी ओर, अंडे नाज़ुक और कमज़ोर थे और इनका पतला छिलका भीतर की ची को बचाए रखता था। खौलते पानी ने उसको ही कठोर बना दिया। अब कॉफ़ी इसका मामला सबसे जुदा है। उबलते पानी का साथ पाकर इन्होंने उसे ही बदल डाला। इन्होंने पानी को एक ऐसी ची में रूपांतरित दिया जो तुम्हें खुशनुमा अहसास से सराबोर कर देती है।
अब तुम मुझे बताओ’, पिता ने पूछा, ‘जब मुसीबतें तुम्हारा द्वार खटखटाती हैं, तो तुम क्या जवाब देती हो? तुम इन तीनों में से क्या हो?’(हिन्दी ज़ेन से)

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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