July 18, 2016

हाइकु

 पावस अलबेली 
- डॉ. सुधा गुप्ता
1
खड़ी है सजी
पावस अलबेली
भू की सहेली। 
2
नभ उमड़ी
भरपूर फ़सल
नीले मेघों की।
 3
चुरा ले गई
कोई नीली ओढऩी
नभ की बिन्दी।
 4
रात उदास -
मेघ-मेले की भीड़
खोई बिन्दिया।
5
आए सावन
तने हैं शामियाने
नीले कासनी।
6
मोती की झार
धरा-वधू ने पाई
मुँह दिखाई
7
उमड़ रहा
नव-वधू धरा का
रूप का ज्वार ।
8
हरी चुँदड़ी
चाँदी -सोने के तार
बूँटे-कढ़ी है ।
9
नभ से  झरे
मेघ-प्रेमोपहार-
आग के फूल।
10
मेघों की पीर -
दिखाए दिल चीर
आग -लकीर ।
11
पहली वर्षा -
रूखी-सूखी थी धरा
खूब नहाई।
12
अल्हड़ निशा
बारिश की धुन पे
नाचती रही।
13
बरसे पिया
तन-मन से तृप्त
बुझी भू -तृषा।
14
लाए सावन
कुठला भर धान
होठों की हँसी।
15
मेघ जो झरे
सोखे धरा-कोख ने
खिले गुलाब।
16
लौटा के लाया
सावन का पाहुना
खोई मुस्कान।
17
आए हैं इन्द्र
प्रिया वृष्टिके साथ
करो सत्कार!
18
घिरे पड़े हैं
अमराई के झूले
मेघ-मल्हार।
19
अब जो आए
जाना नहीं बिदेस’-
कहे धरती।
20
मैं तो उर्वरा
छोड़ऩा न परती
मैं फलवती।

सम्पर्क: 120 बी/2, साकेत, मेरठ- 250003, 
फोन- 94-10029500

0 Comments:

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

-0-

लेखकों सेः उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष