उदंती.com को आपका सहयोग निरंतर मिल रहा है। कृपया उदंती की रचनाओँ पर अपनी टिप्पणी पोस्ट करके हमें प्रोत्साहित करें। आपकी मौलिक रचनाओं का स्वागत है। धन्यवाद।

Mar 14, 2014

बेटियाँ

बेटियाँ

- संजय वर्मा

नन्ही हथेली में
पकडऩा चाहती है चाँद को।
जिद्दी करके
पाना चाहती है चाँद को।
छुप जाता है जब
माँ को पुकारती पाने चाँद को।
थाली में पानी भरकर
परछाई से बुलाती माँ चाँद को।
छपाक से पानी में
हाथ डाल पकडऩा चाहती चाँद को।
छुपा-छाई खेलते हुए
बिटियाँ पा जाती है चाँद को।
चाँद तो अब भी है आकाश में
बिटियाए कम हो गई पाने चाँद को।
खो गई है बेटियाँ
माँ कैसे कहे ये बात चाँद को।


सम्पर्क-125, शहीद भगत सिंग मार्ग
मनावर जिला -धार (म.प्र.)
Email- antriksh.sanjay@gmail.com

No comments: