April 13, 2013

दो ग़ज़लें



1
तुम्हारी याद
- प्राण शर्मा
 तुम्हारी याद ही तुमसे भली है,
जो गम में साथ देने आ गयी है।

भला क्यों ना सराहूँ संग तेरा,
कि तुझमें ताज़गी ही ताज़गी है।

कभी तो डाल  दे  तू  आके डेरा,
बड़ी सुनसान-सी दिल की गली है।

कोई  करता नहीं दु:ख-सुख की बातें,
जिधर देखो उधर सौदागरी है।

ह्रदय में आस है मिलने की बाक़ी,
अभी इस घर में कुछ-कुछ रोशनी है।

मुझे अच्छा  लगे क्योंकर न यारो,
लड़कपन का मज़ा कुछ और ही है।

ग़ज़ल कहता हूँ तेरा ध्यान करके,
यही ए 'प्राणअपनी आरती है।

  2
ग़मों की उम्र
कहीं  टूटे  नहीं  कोमल  बड़ी है,
वफ़ा के मोतियों की जो लड़ी है।

ज़रा तकलीफ फरमाओ तो जानें,
हमारी जान होंठों  पर अड़ी  है।

यही समझा, यही जाना है हमने,
ग़मों की उम्र खुशियों से बड़ी है।

ज़रा देखो मजाज़ उसका अनोखा,
खुशी चौखट पे ही मेरी खड़ी है।

कहीं तो मिल ही जाएगा ठिकाना,
अभी इतनी बड़ी दुनिया पड़ी है।

सँभाले रखना उसको पास अपने,
शराफ़त 'प्राण  दौलत से बड़ी है। 

  संपर्क: 3, CRAKSTON CLOSE , COVENTRY CV25EB, U.K
              Email- sharmapran4@gmail.com

2 Comments:

vandana gupta said...

प्राण जी के लेखन की यही खासियत है कि हर शेर मे प्राण फ़ूँक देते हैं ………लाजवाब गज़लें।

Binu Bhatnagar said...

as usual, both ghajals are greatfrom agreat shyar.i am short of adjectives.

लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष