December 18, 2012

हाइकु

उतरी साँझ 
 -भावना सक्सैना
1
 मन-बंजारा
भटके हर दिन
खोज खुशी की।
2
मन के पाखी
उड़ें अनियंत्रित
तन में कैद।
3
धूप साँझ की
सींचती अन्तर्मन
यादें जीवन।
4
नर्म आँचल
धूप गुनगुनी-सी
माँ की ममता।
5
बुहारा हुआ
आसमान साँझ का
सुखद दृश्य।
6
ऊँचा शिखर
उस पर जो चढ़ा
बस एकाकी।
7
महान गिरि
कण-कण से बना
कण को भूला।
8
उड़ती खुशी
नीली तितली सम
कैसे पकड़ें?
9
निशा उतारे
चूनर तारों-भरी
आए प्रकाश।
10
नवल गात
पहन भोर आई,
खिला संसार।
11
तेरे होने से
जीवन में उजाला
खिलती खुशी।
12
उतरी साँझ
निशा- दामन फैला
तम ने सींचा।
13
देख दर्पण
आक्रांत हुआ मन-
बीता यौवन।
14
खाली है नीड़
अश्रुप्लावित मन
लुप्त जीवन।
15
बरसों बीते
गाँव की वे गलियाँ
नाम पूछतीं।
16
तुम लाए हो,
स्नेह-पूरित मन
पाया जीवन।
17
छप्पर नीचे,
चढ़ा है दुमंजिला
सिमटी धूप।
18
शान्त थी नदी
किनारों में जो बँधी
बहती रही।
19
आया था ज्वार
तोड़ सब सीमाएँ
मचल उठी।
20
सुख सुविधा
सब कुछ है पास
फिर भी प्यास।
21
ओस की बूँद
बस इक प्यारा पल
यही जीवन।
22
मन में बसे
वे मधुर बसंत
लौट न पाए।
23
जीवन-राह
समझौते अनंत
है अग्निपथ।
24
बिछुड़े अब
फिर कहाँ मिलेंगे
द्रवित मन।

लेखक के बारे में: भावना सक्सैना भारत सरकार के गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग में कार्यरत हैं। पिछले साढ़े तीन वर्ष सूरीनाम स्थित भारत के राजदूतावास में अताशे (हिन्दी व संस्कृति) पद पर प्रतिनियुक्त रहकर वहाँ हिंदी प्रचार-प्रसार करती रहीं। आपके प्रोत्साहन से सूरीनाम के हिन्दी लेखकों में नव-ऊर्जा का संचार हुआ। आपने सूरीनाम साहित्य मित्र संस्था द्वारा प्रकाशित प्रथम कविता संग्रह ‘एक बाग के फूल’ और कवि श्री देवानंद शिवराज के कविता संग्रह ‘अभिलाषा’ का संपादन किया और ‘सूरीनाम में हिन्दुस्तानी, भाषा, साहित्य व संस्कृति’ नामक पुस्तक लिखी है। समय-समय पर कई लेख, कविता व कहानी कई पत्र-पत्रिकाओं में छपते रहते हैं।

संपर्क: 64,प्रथम तल, इंद्रप्रस्थ कॉलोनी, सेक्टर 30-33,फरीदाबाद, हरियाणा 121003

Email- bhawnasaxena@hotmail.com, bhawnavsaxena@gmail.com

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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