July 11, 2010

निरुत्तर

-के. पी. सक्सेना 'दूसरे'
बैठक मंत्री महोदय के बंगले पर चल रही थी। विषय था- सिगरेट के पैकेट में वैधानिक चेतावनी किस रुप में दी जाय कि संदेश तो चला जाय पर वीभत्स भी न लगे। कुछ लोगों का यह भी कहना था कि अगर रेखांकन डरावना न होगा तो प्रभावशाली भी नहीं होगा।
लोग मतैक्य नहीं हो पा रहे थे क्योंकि सभी बुद्धिमान थे। तभी मंत्री जी का 10 वर्षीय पुत्र सिगरेट की बात सुनकर वहां से निकलते- निकलते ठिठक गया। वह धीरे से मंत्री जा के पास पहुंच कर बड़े लाड़ से बोला- पापा हमारी क्लास में भी सर ने धूम्रपान निषेध दिवस पर एक चित्र बनाकर लाने को कहा है। पर पापा सिगरेट क्या सचमुच बहुत बुरी होती है?
बालक की मासूमियत पर बैठे लोग मुस्कुरा उठे। हां बेटा। ये तो पीने वाले के साथ- साथ उनके आस- पास जो रहता है उसे भी नुकसान करती है। मंत्री जी ने अबोध बालक की न केवल जिज्ञासा शांत की अपितु उसका ज्ञान भी बढ़ाया।
पापा तो फिर आप सीधे सिगरेट बनाना क्यों नहीं बंद करा देते। नादान पुत्र के प्रश्न पर बुद्धिमान पिता निरुत्तर होकर रह गए।
बोकरा भा
जब करीम मियां उसे मंडी से लेकर आए तो उसकी कद- काठी देखकर घर के सभी लोगों ने उसे शेरू नाम दे दिया। बाड़े की खूंटी में बांधे जाते ही उसे अपने अंजाम का आभास हो गया। एक क्रूर सत्य को अपनी नियति मानकर अब वह केवल यह मनाने लगा कि जिब्ह होउं तो कम से कम किसी नेक दिन। तभी उसे बकरीद का ख्याल आया - अगले माह ही तो है शायद। इससे और अच्छा दिन क्या होगा।
इतना सोचते ही उसके मन से मौत का भय एकदम काफूर हो गया। अब उसने अपना सारा ध्यान शरीर बनाने में लगाना शुरू कर दिया। करीम मियां वैसे भी उसकी खुराक का खूब ध्यान रखते- शायद अच्छे दाम के लालच में। उसे भी पता था कि ऐसे अवसरों पर लोगों की पसंद ही मायने रखती है- कीमत तो वे अक्सर हैसियत से अधिक दे डालते हैं।
ऐसे ही एक सुबह जब वह करीम के बेटे के साथ सींग लड़ा रहा था अचानक जब करीम मियां अखबार पढऩा छोड़ सीधे भीतर की ओर भागे तो उसका माथा ठनका। निश्चित ही अखबार में कोई खास खबर है यह सोचकर वह उसे सूंघ ही रहा था कि जनानखाने से करीम मियां की आवाज सुनायी दी-
सुनती हो - चुनाव का ऐलान हो गया- बकरीद से पहले होंगे। अब शेरू पहले ही निकल लेगा- 'बोकरा भात' के लिए। तू जरा उसकी खुराक पर ध्यान दे। जितनी चर्बी बढ़ेगी उतना दाम चढ़ेगा और हमें बकरीद का इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा।
करीम मियां बाहर आकर उसकी गर्दन सहलाने लगे और वह दीवार पर सींग रगड़ते हुए सोच रहा था- कल से बीमार पड़ जाऊं तो कैसा रहेगा।

सम्पर्क- श्री शांतिनाथ नगर, टाटीबंध, रायपुर (छत्तीसगढ़) 492099,
मो. 09584025175, Email: kashipsaxsena@yahoo.co.in

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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