March 18, 2010

कभी देखा है सफेद हिरन

फेद बाघ और सफेद भालू के बारे में तो आपने सुना और देखा भी होगा लेकिन क्या आपने कभी सफेद हिरन के बारे में कभी सुना है। अगर नहीं तो इसके लिए आपको इटली के जंगलों में जाना होगा।

जी हां इटली की डोलोमाइट क्षेत्र की पर्वत श्रृंखलाओं के जंगलों में सफेद हिरन पाया गया है। पिछले माह पहले हिरन का एक छोटा-सा बच्चा अपनी मां के साथ जंगलों में देखा गया था। मजे की बात यह है कि इसके मां-बाप में से कोई भी सफेद नहीं है। उनका रंग एक सामान्य हिरन की तरह हल्का पीला है। विशेषज्ञों का कहा मानें तो इस हिरन को एलबिनिस्म नाम की बीमारी है। इस बीमारी में शरीर में पाया जाने वाल आवश्यक तत्व मेलानिन न के बराबर होता है। जिसमें पूरा शरीर सफेद होता है। ये बीमारी मनुष्यों में काफी आम है। इसमें शरीर के लिए सूर्य की रोशनी नुकसानदायक होती है।
ब्रिटेन के फोटोग्राफर ने इस नन्हे सफेद हिरन की अठखेलियों को अपने कैमरे में कैद किया है। इटली के वन अधिकारियों ने इस हिरन को जंगलों से हटाकर सरकारी संरक्षण में रखने का आदेश दिया है। क्योंकि उन्हें डर है कि जंगल में कहीं ये दुर्लभ हिरन शिकारियों का शिकार न बन जाए। उसके साथ उसकी मां को भी सरकारी संरक्षण में रखा जाएगा
अधिकारियों का कहना है कि वे नहीं चाहते कि इस हिरन का हाल भी हालीवुड की चर्चित फिल्म बांबी के हिरन जैसा हो जिसमें हिरन के छोटे से बच्चे को उसकी मां से जुदा कर दिया गया था, उसके बाद उसकी मां को शिकारियों ने अपना निशाना बना लिया था। स्थानीय पुलिस अधिकारी जिमारिया सोमाविला ने बताया, यह बहुत ही दुर्लभ प्रजाति है। क्योंकि आखिरी बार कई दशकों पहले सफेद हिरन देखा गया था। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस हिरण की सुरक्षा में कोई कमी नहीं की जाएगी।
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जरा सोचें
आज जहां देखो उधर ढोंगी बाबाओं और साधू महाराजों का बोलबाला है। इन्हें देख कर यही लगता है कि भारत में धर्म और आध्यात्म अपने शिखर पर पंहुच गया है। लेकिन क्या वास्तव में वे जो कह रहे हैं वह हकीकत है। पिछले दिनों जिस प्रकार से विभिन्न अपराधों में ये तथाकथित बाबा लिप्त पाए गए वह तो कुछ और ही कहानी बयां करती है। जाहिर है वे गेरुए वस्त्र की आड़ में काले कारनामों को अंजाम देने तथा देश और विदेश में अकूत संपत्ति इकठ्ठा करने में लगे हुए हैं।
इन सबको जानने और समझने के बाद क्या हम सब अब भी चुपचाप आंख मूंद कर इन पर विश्वास करते चले जाएंगे या कि इनके काले कारनामों को बढ़ावा देने के बजाय इनके विरोध में आवाज उठाएंगे। दुख तो इस बात का है कि आम जनता भेड़ चाल की तरह इनके चमत्कारों के फेर में फंस जाती है और इनकी पूजा करने लगती है। ऐसे अंधविश्वास के पीछे सिर्फ एक ही कारण नजर आता है और वह है अशिक्षा। आइए हम सब मिलकर जरा सोचें ताकि ऐसे बाबाओं को पनपने फूलने का अवसर ही न मिले।
वाह भई वाह
एक दिन भरी दोपहरी में एक बूढ़ा आदमी एक ही किताब बेच रहा था। उसे देख एक लड़का आया और किताब खरीदनी चाही। बूढ़े ने वह किताब लड़के को 3000 ह्जार रुपए में बेच दी और कहा कि किताब का आखरी पेज मत पढऩा वरना तुम्हें बहुत परेशानी होगी।
लड़के ने सारी किताब पढ़ी। उसे किताब बहुत अच्छी लगी लेकिन आखिरी पेज के बारे में वह सोचता रहा। एक हफ्ते बाद जब उससे नहीं रहा गया तो उसने आखिरी पेज खोल ही लिया। उस पर लिखा था- MAXIMUM RETAIL PRICE: Rs.30/-
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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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