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Oct 3, 2021

कविता- स्त्री

- दिव्या शर्मा

असफल प्रेम में

स्त्री व्यभिचारिणी घोषित होती है

क्योंकि पुरुष, स्त्री के चरित्र तले

खुद को छिपा लेता है।

 

असफल विवाह में

स्त्री दोषी घोषित होती है

क्योंकि पुरुष, स्त्री के अवगुण तले

खुद को छिपा लेता है।

 

असफल संस्कारों में

स्त्री दोषी घोषित होती है

क्योंकि पुरुष, स्त्री के आँचल तले

खुद को छिपा लेता है।

 

धर्म के पतन के लिए

स्त्री दोषी घोषित होती है

क्योंकि पुरुष, स्त्री के अधर्म तले

खुद को छिपा लेता है।

 

स्त्री ढक दी जाती है

पुरूषों की निगाहों से बचाने के लिए

क्योंकि पुरुष, स्त्री की देह तले

खुद को छिपा लेता है।

 

कुरीतियों को बचाने के लिए

खींच ली जाती है स्त्री की चादर

क्योंकि पुरुष,परंपरा के बोझ तले

खुद को छिपा लेता है।

 

डायन होती हैं यह स्त्रियाँ

इसलिए नग्न घुमाई जाती हैं

क्योंकि पुरुष, समाज के रिवाज तले

खुद को छिपा लेता है।


सम्पर्कः मकान नंबर- 4,गली नंबर-9 ,अशोक विहार फेज -2,गुरुग्रामहरियाणा--122001

मोबाइल नंबर -7303113924

1 comment:

Sudershan Ratnakar said...

बहुत सुंदर।