October 05, 2020

हाइकुः प्रणय गीत


 -रश्मि विभा त्रिपाठी 'रिशू'

प्रेम पावस
मिटा दे अन्तर्दाह
बरसा प्यार

जमीं आसमाँ
मन उड़ता फिरे

न जाने कहाँ

मन बेहाल
स्मृति मकड़ियाँ हा!
बुनती जाल

आओ मैं देखूँ
निज मन में प्रिय
तुम्हें समेटूँ

उर-कमल
मुरझाया प्रिय बिन
साँसें विकल

स्मृति- रथ
हो सवार चला है
मन तू कहाँ

स्मृति की रीत
छीन एकांत करे
अनुग्रहीत

भूलो संताप
बीती बिसारो अब
मुस्करा भी दो

अपरिमित
प्रेम हा! प्रिय रहा
अपरिचित

बिछा पलक
निहारूँ राह प्रिय
दे दो झलक

ओ मनमीत
हूँ  मन्त्रमुग्ध सुन
प्रणय गीत

विरह पीर
मिटी कान्हा  ज्यों देखे
जमुना -तीर


लेखक के बारे में- जन्म - 3 सितम्बर 1986

तहसील बाह, जिला आगरा उत्तर प्रदेश 
शिक्षा - एम ए ( शिक्षाशास्त्र ), बी एड,शोधार्थी सी एस जे एम विश्वविद्यालय कानपुर, 
रचना प्रकाशन - त्रिवेणीहिन्दी हाइकुहिन्दी चेतनासहज साहित्यसेतुभारत दर्शनहम हिन्दुस्तानीसाहित्य मंजरीरचनाकारस्वर्ग विभा एवं हिन्दी कुंज डॉट कॉम। 

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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