February 11, 2020

लघुकथा

भाई-भाई 
- ख़लील जिब्रान , अनुवाद - सुकेश साहनी

ऊँचे पर्वत पर चकवा और गरुड़ की भेंट हुई। चकवा बोला, ‘‘शुभ प्रभात, श्रीमान्!’’
गरुड़ ने उसकी ओर देखा और रुखाई से कहा, ‘‘ठीक है-ठीक है।’’ चकवे ने फिर बात शुरू की, ‘‘आशा है, आप सानन्द हैं। ’’
गरुड़ ने कहा, ‘‘हाँ, हम मजे में हैं पर तुम्हें मालूम होना चाहिए कि तुम पक्षियों के राजा से बात कर रहे हो। जब तक हम बात शुरू न करें, तुम्हें हमसे बात शुरू करने की गुस्ताखी नहीं करनी चाहिए।’’
चकवे ने कहा, ‘‘मेरे ख्याल से हम दोनों एक ही परिवार से हैं।’’  
गरुड़ ने आँखें निकालकर घृणा से उसकी ओर देखा, ‘‘किस बेवकू ने कह दिया कि हम एक ही परिवार से हैं?’’
तब चकवे ने कहा, ‘‘मैं आपको याद दिला दूँ कि मैं आपके समान ऊँचा उड़ सकता हूँ। इसके अलावा मैं अपने सुमधुर गीतों से दूसरों का मनोरंजन भी कर सकता हूँ। आप किसी को भी सुख और खुशी नहीं दे सकते।’’
इस पर गरुड़ ने  क्रोधित होते हुए कहा, ‘‘सुख और खुशी! अबे ढीठ, मैं अपनी चोंच की एक चोट से तेरा काम तमाम कर सकता हूँ। तू तो मेरे पैर जितना भी नहीं है।’’
चकवा उड़कर गरुड़ की पीठ पर जा बैठा और उसके पंख नोचने लगा। गरुड़ भी गुस्से में था, उससे पिण्ड छुड़ाने के लिए वह तेजी से काफी ऊँचाई तक उड़ता चला गया। लेकिन उसका बस नहीं चला। हारकर वह फिर उसी चट्टान पर आ गया। चकवा अब भी उसकी पीठ पर सवार था। गरुड़ उस घड़ी को कोस रहा था, जब वह उस तुच्छ पक्षी से उलझ पड़ा था।
तभी एक कछुआ वहाँ  आ निकला। गरुड़ और चकवे की हालत देखकर उसे हँसी आ गई। वह हँसते-हँसते लोट-पोट हो गया।
गरुड़ ने कछुए की ओर देखकर कहा, ‘‘पृथ्वी पर रेंगने वाले कीड़े, हँसता क्यों है?’’
कछुए ने कहा, ‘‘क्या यह हँसने की बात नहीं है कि आपको घोड़ा बनाकर एक छोटा-सा पक्षी आपकी पीठ पर सवारी कर रहा है।’’
गरुड़ ने कहा, ‘‘अबे जा, अपना काम कर। यह तो मेरे भाई चकवे का और मेरा घरेलू मामला है।’’

2 Comments:

Vibha Rashmi said...

खलील ज़िब्रान की मानवेतर बहुत सशक्त लघुकथा ।
तुच्छ प्राणी भी बुद्धि बल में बड़ा हो सकता है । खलील ज़िब्रान की अन्य कथाओं जैसी भाषा व शिल्प
प्रभावशाली ।

Vibha Rashmi said...

खलील ज़िब्रान की मानवेतर बहुत सशक्त लघुकथा ।
तुच्छ प्राणी भी बुद्धि बल में बड़ा हो सकता है । खलील ज़िब्रान की अन्य कथाओं जैसी भाषा व शिल्प
प्रभावशाली ।

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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