January 15, 2019

आत्म-निर्णय

आत्म-निर्णय 
– अशोक जैन

थके- हारे जोशी जी दीवान के एक ओर बैठ गए। मातमपुर्सी के लिए आने-जाने वालों को एक ही घटना का जिक्र करते करते उन्हें जीवन की निस्सारता का बोध हो चला था। आँखों की कोरों में आँसू पोंछने के लिए हाथ उठा तो किसी के हाथों
से टकरा गया। हरी बाबू थे उनके सहकर्मी।
ध्ीरज रखो, जोशी। यह तो काल चक्र है।’
हरी, वह तो चली गई। लेकिन....।’ वे वाक्य पूरा न कर पाये कि रुलाई फूट पड़ी।
हरी बाबू ने कंधे पर हाथ रखकर सहारा दिया।
तुम्हारे साथ 35 वर्षों तक दायित्व निभाती रही, दोनों बेटियों को अपने-अपने घर भिजवा दिया। तुम्हारे रिटायर्ड होने की खुशी भी देख ली... बस इतना ही साथ था तुम्हारे उनके साथ।’
जोशी जी चुप रहे।
हरी बाबू ने फिर कहा, ‘जीवन है, जीना तो पड़ेगा ही। अपने लिए ही सही।
हौंसला रखो, सुमन जी की आत्मा को वेदना पहुँचेगी...।’
तभी छोटी बेटी चाय रख गई।
अंकल, पापा को चाय पिला दो। सुबह से कुछ नहीं खाया।’
दोनों खामोश। चाय की एक सिप लेकर जोशी जी कप नीचे रखने लगे तो हरी बाबू ने उन्हें मना किया।
पढ़े लिखे हो। सब जानते हो। शिक्षक रहे हो, फिर भी....।’
एकाएक जोशी जी की जैसे तन्द्रा टूटी।
हरी बाबू! आप कुछ काम के लिए कह रहे थे, उस वृद्धाश्रम...।’
हाँ चलो! वहाँ चलें।’
और अगली सुबह सभी ने देखा-सुना-
जोशी जी वृद्धाश्रम में रह रहे अपने हम उम्र लोगों के मध्य रामचरितमानस का पाठ सुना रहे थे।
उनकी मधुर स्वर लहरी से सभी मंत्र- मुग्ध थे।
उन्हें लगा कि उनके आत्मनिर्णय से उनका शेष जीवन सहज रूप से कट जाएगा।

email- ashok.jain908@gmail.com

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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