October 24, 2017

सूचना क्रांति:

     सोशल मीडिया और हम  
              - श्याम बाबू शर्मा
सोशल मीडिया से आज कौन अपरिचित होगा? आज सोशल मीडिया, संवाद का वह सशक्त माध्यम बन गया है, जिससे हम दुनिया के किसी भी कोने में बैठे उन लोगों से संवाद एवं विचार-विमर्श कर सकते हैं, जिनके पास इंटरनेट की सुविधा है। इसके जरिए हमें एक ऐसा साधन मिला है, जिससे हम न केवल अपने विचारों को दुनिया के समक्ष रख सकते हैं, बल्कि दूसरे के विचारों के साथ-साथ दुनिया भर की तमाम गतिविधियों से भी अवगत होते हैं। सोशल मीडिया सामान्य सम्पर्क या संवाद ही नहीं, बल्कि हमारे कैरियर को तराशने एवं नौकरी तलाशने या लेखन- प्रसार में भी पूरी सहायता उपलब्ध कराता है।
एक वह भी ज़माना था, जब हम कबूतरों के जरिए सूचनाओं का आदान-प्रदान करते थे, फिर कबूतरों का स्थान पत्रवाहकों ने ले लिया और क्रमश: डाकियों के ज़रिये पत्र भेजकर सूचनाओं का आदान-प्रदान करते थे। पत्र को भेजने और उसका उत्तर प्राप्त करने में हमें महीनों लग जाते थे ; लेकिन आज..., आज सूचना क्रांति ने हमें सात समुंदर पार बैठे लोगों से भी सीधे बात करने की सुविधा उपलब्ध करा दी है। हम अपने घर-परिवार, हित-मित्रों के हाल-चाल से उन्हें तत्काल अवगत करा सकते हैं। इसे यदि एक वाक्य में कहा जाए तो आज पूरी दुनिया विश्वग्राममें परिवर्तित हो चुकी है और इसका पूरा श्रेय सूचना- क्रांति को जाता है। इसी सूचना -क्रांति से सोशल मीडिया का जन्म हुआ है।
पिछले दो दशकों में हम देखें तो इंटरनेट आधरितसोशल मीडिया ने हमारी जीवन-शैली को बदलकर रख दिया है। हमारी जरूरतें, हमारी कार्य प्रणालियाँ, हमारी रुचियाँ-अभिरुचियाँ और यहाँ तक कि हमारे सामाजिक मेल-मिलाप, वैवाहिक सम्बन्धों का सूत्रधार भी किसी हद तक सोशल मीडिया ही है। सोशलनेटवर्किंग या सामाजिक सम्बन्धों के ताने-बाने को रचने में इसकी भूमिका काफी महत्त्वपूर्ण है। इसके जरिये हम घर बैठे दुनिया भर के अनजान और अपरिचित लोगों से सामाजिक, राजनीतिक एवं आंतरिक सम्बन्ध बना रहे हैं। ऐसे लोगों से हमारी गहरी छन रही है, अंतरंग संवाद हो रहे हैं, जिनसे हमारी वास्तविक जीवन में कभी मुलाकात ही नहीं हुई है। इतना ही नहीं, हम इसके माध्यम से अपने स्कूल-कॉलेज के उन पुराने दोस्तों को भी खोज निकाल रहे हैं, जिनके साथ हम कभी पढ़े-लिखे, बड़े हुए और फिर वे धीरे-धीरे कर्त्तव्य दायित्व के बोझ तले दुनिया की भीड़ में कहीं खो गए।
दरअसल, इंटरनेट पर आधरित सम्बन्ध-सूत्रों की यह अवधरणा यानी सोशल मीडिया को संवाद- मंच के तौर पर माना जा सकता है, जहाँ हम जैसे तमाम ऐसे लोग, जिन्होंने वास्तविक रूप से अभी एक-दूसरे को देखा भी नहीं, परन्तु एक-दूसरे से बखूबी परिचित हो चले हैं। आपसी सुख-दुख, पढ़ाई-लिखाई, मौज-मस्ती, काम-धंधे की बातों के साथ-साथ सपनों की बातें भी हममें होती हैं।
दुनियाभर में लगभग 200सोशलनेटवर्किंगसाइटें हैं जिनमें फेसबुक, ट्वीटर, आरकुट, माईस्पेस, लिंक्डइन, फ्लिकर, इंस्टाग्राम (फोटो, वीडियोशेयरिंगसाइट) सबसे अधिक लोकप्रिय हैं। एक सर्वेक्षण के मुताबिक दुनिया भर में करीब 1 अरब 28 करोड़ फेसबुक प्रयोक्ता हैं। वहीं, इंस्टाग्राम के 15 करोड़, लिंक्डइन के 20 करोड़, माईस्पेस के 3 करोड़ और ट्वीटर के 9 करोड़ प्रयोक्ता हैं। कहा जाए तो सोशल मीडिया के क्षेत्र में फेसबुक सबसे अग्रणी है।

सोशलनेटवर्किंगसाइट युवाओं की जिन्दगी का एक मुख्य अंग बन गया है। अगर सही मायने में देखा जाए तो आज का दौर युवाशक्ति का दौर है। इसके माध्यम से वे अपनी बात सशक्त तरीके से देश और दुनिया के हर कोने तक पहुँचा सकते हैं। कहा जाता है कि भारत युवाओं का देश है। भारत में इस समय 65प्रतिशत के करीब युवा हैं जो किसी और देश में नहीं हैं और इन युवाओं को जोड़ऩे का काम सोशल मीडिया कर रहा है। युवाओं में सोशलनेटवर्किंगसाइट का क्रेज दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है, जिसके कारण आज सोशलनेटवर्किंग दुनिया भर में इंटरनेट पर होने वाली नंबर वन गतिविधि बन गया है। इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार भारत के शहरी इलाकों में प्रत्येक चार में से तीन व्यक्ति सोशल मीडिया का किसी न किसी रूप में प्रयोग करते हैं। अब तो भारत के गाँवों में भी सोशल मीडिया का क्रेजदिनोंदिन बढ़ता जा रहा है।
एक वह भी ज़माना हमने देखा है, जब लेखन कार्य के क्षेत्र में कुछ गिने-चुने लोगों का ही वर्चस्व था, परन्तु सोशल मीडिया ने आज आम जन-सामान्य को भी लेखन कार्य से जोड़ दिया है। आज पत्रकारिता करने के लिए इसकी औपचारिक डिग्री की आवश्यकता नहीं रह गई है। सोशल मीडिया पर आज प्रत्येक व्यक्ति स्वतंत्र पत्रकार हो गया है। वह अपने आस-पास घटित घटनाओं पर अपने स्वतंत्र विचार रखने के लिए इस मंच का भरपूर उपयोग कर रहा है। हम पर सोशल मीडिया का प्रभाव बहुत ही गहरा हुआ है। अब हम ज्यादा सोचने-समझने और सपने देखने लगे हैं और उन सपनों को सोशल मीडिया के जरिए पूरा करने का प्रयास करते हैं। सोशल मीडिया जहाँ एक तरफ हमारे सपनों को एक नई दिशा दे रहा है, वहीं दूसरी ओर उन्हें साकार करने के लिए माध्यम भी उपलब्ध करा रहा है। ब्लॉगिंग के जरिए जहाँ हम अपनी समझ, ज्ञान और भड़ास निकालने का काम कर रहे हैं, लिंक्डइन पर प्रोफेसनल्स से जुडक़र हम अपने कैरियर को नई ऊँचाई दे रहे हैं। वहीं सोशल मीडिया साइट के जरिए दुनिया भर में अपने समान मानसिकता वालों को जोडक़र सामाजिक सरोकार-दायित्व को पूरी तन्मयता से पूरा करने में संलग्न हैं।
अब सोशल मीडिया के रूप में आम आदमी को ऐसा टूल मिल गया है जिसके जरिये वह अपनी बात एक बड़ी आबादी तक सुगमतापूर्वक पहुँचा सकता है। इसे सोशल मीडिया की लोकप्रियता ही कहा जाए कि आज आम आदमी से लेकर खास आदमी भी इससे जुड़ा हुआ है। हमने देखा है कि कभी कम्प्यूटर का भारी विरोध करने वाले वामपंथी नेताओं को भी पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान फेसबुक पर आना पड़ा था। एक वरिष्ठ माकपा नेता का कहना है कि लोगों से संवाद करने के लिए सोशल मीडिया एक महत्त्वपूर्ण माध्यम है। उनका कहना है, सोशल मीडिया आज बहुत ही जरूरी माध्यम हो गया है। इसके जरिये एक बड़ी आबादी से अपने विचार साझा किए जा सकते हैं। पिछले एक दशक में इस माध्यम का काफी विस्तार हुआ है। हालांकि वे मानते हैं कि राजनीति और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जनता से सीधे सम्पर्क साधना चाहिए, न कि परोक्ष माध्यम के जरिये। उन्होंने कहा, सोशल मीडिया के जरिये लोगों से सम्पर्क तो हो सकता है;लेकिन उनकी समस्याओं के बारे में पता नहीं चल सकता है।
एक बात तो तय है कि जो वरदान है, वही अति होने पर अभिशाप भी बन जाता है। आपको याद होगा, जब हम स्कूल में पढ़ते थे, तो लगभग प्रत्येक विद्यार्थी को  हिन्दी  में हो या अंग्रेजी में, एक निबंध तो अवश्य ही तैयार करना होता था कि विज्ञान वरदान है या अभिशाप। यह निबंध परीक्षा में अवश्य ही पूछा जाता रहा है। निबंध का उपसंहार लिखते समय हम अपनी बात यह कहकर समाप्त करते थे, कि विज्ञान हमारे जीवन में तभी तक बहुत ही उपयोगी है, जब तक कि उसका सही इस्तेमाल किया जाए। जहाँ इसकी अति हुई वहीं से विनाश होना संभाव्य हो जाता है। यही बात सोशल मीडिया के ऊपर भी लागू होती है। यदि सोशल मीडिया का इस्तेमाल सकारात्मक रूप में किया जाए तो यह उपयोगी है और यदि इसका इस्तेमाल नकारात्मक रूप में किया जाए तो यह विनाशी और प्रलयंकारी होने में क्षण भर नहीं लगाता।
 कई सर्वेक्षणों में भी यह बात सामने आ रही है कि सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव लोगों के जीवन को बरबाद कर रहा है, कई ऐसी खबरें भी आईं हैं कि फेसबुक के कारण बहुत सारे लोगों के वैवाहिक संबंधों में दरार आ रही है। दुनिया भर में आए इन बदलावों में सोशल मीडिया खासकर ट्विटर और फेसबुक ने अहम भूमिका निभाई है। फेसबुक के संस्थापक मार्कजुकरबर्गफेसबुक के अपने खास फीचर और उपयोगकर्ताओं की संख्या के लिए पहले ही बहुत मशहूर हैं, लेकिन अब दुनिया के इतिहास में बड़ा बदलाव लाने के लिए उनका नाम याद किया जाएगा। एक ऐसा व्यक्ति जिसने दुनिया भर के कई मुल्कों में बगैर किसी घातक हथियार के जनक्रांति की बयार बहा दी। इस बयार में कई मुल्कों में सत्ता पर लंबे समय से कब्जा जमाए हुए लोग हाशिए पर चले गए। इन क्रांतियों में जनता ने अभिव्यक्ति को आवाज देने के लिए फेसबुक का सहारा लिया। आने वाले सालों में जब क्रांतियों का इतिहास खंगाला जाएगा तो उसमें साइबर युग नाम का एक नया अध्याय अवश्य जुड़ा होगा।
गौरतलब है कि सोशल मीडिया के ये प्लेटफार्म न सिर्फ व्यक्तिगत जानकारियों के लिए ही प्रयोग में लाए जाते हैं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक मामलों में भी इनका प्रयोग हो रहा है। आपने देखा होगा कि सशक्त लोकपाल बिल की मांग कई दशकों से चली आ रही थी, लेकिन अन्ना हजारे के नेतृत्व में जिस तरह से भारत में इसकी मांग ने जोर पकड़ी और उसमें लोगों का जन-समर्थन मिला, वह तो चौंकाने वाला ही था। इंटरनेट पर यह आंदोलन बहुत ही तेजी से फैला। यू-ट्यूब पर अन्ना के इस अहिंसक संघर्ष को लाखों लोगों ने देखा। ट्विटर की दुनिया में भी इस क्रांति का तहलका मचा हुआ था। भारी संख्या में खासो-आम और आम आदमी के ट्वीट इस आंदोलन के समर्थन में आ रहे थे। सोशल मीडिया के माध्यम से ही अन्ना के इस आंदोलन को पूरी दुनिया में फैले भारतीयों और विदेशियों का समर्थन मिला।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012 में देश की राजधानी दिल्ली में हुए निर्भया कांडमें कैसे लोग दोषियों को सजा दिलाने के लिए एकजुट होकर उठ खड़े हुए थे। इसका पूरा प्रभाव पूरे देश में देखने को मिला था और यह सोशल मीडिया का ही कमाल था।
16वीं लोकसभा चुनाव के दौरान भी हमने देखा कि किस तरह विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने सोशल मीडिया का उपयोग किया, परन्तु जिस तरह नरेन्द्र मोदी जी की अगुआई में भाजपा ने सोशल मीडिया का उपयोग किया और जिस तरह भाजपा के खाते में बम्पर जीत आई, वह विस्मयकारी थी। मोदी जी ने फेसबुक, ट्विटर और यू-ट्यूब के जरिए जिस तरह लोकप्रियता हासिल की, वह एक नया इतिहास बना। लोग उनके फेसबुक पर पोस्ट की गई बातों और तस्वीरों को पोस्ट करते, प्रतिक्रिया देते और उनकी लोकप्रियता में चार चांद लगाते।  पीएम मोदी जी यह जानते हैं कि यदि लोगों से जुडऩा है ,तो सोशल मीडिया एक सशक्त माध्यम हो सकता है। इसी कारण वे आज भारत के नागरिकों एवं अप्रवासी लोगों के दिलों पर राज कर रहे हैं।
नकारात्मक एवं सकारात्मक सोच के लोग इसी समाज में रहते हैं। हमें सोशल मीडिया का इस्तेमाल किस सोच के साथ एवं कैसे करना है, यह हमें ही तय करना है। परन्तु इतना जरूर याद रखें कि सोशल मीडिया को इस्तेमाल करते वक्त हम सबको थोड़ी सावधनियाँ जरूर बरतनी होगी। कहीं ऐसा न हो जाए कि अति हो, क्योंकि अति सर्वत्र वर्जयेत।
सम्प्रति: वरिष्ठ अनुवादक, राजभाषा विभाग/मुख्यालय, पूर्वोत्तर रेलवे, गोरखपुर,
 मो.०९७९४८४०६७४ 
shyamgkp1964@gmail.com, rajbhasha1@gmail.com

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