August 12, 2016

माहिया

तुम पार लगा देना 
-डॉ. सुधा गुप्ता
1
तुम हाथ बढ़ा देना
करुणाकर !सुन लो
तुम पार लगा देना 
2
मन को अब चैन नहीं
आँखें रीती हैं
होठों पर बैन नही।
3
अमरस अँगनाई में
कोयल कूक रही
अब तो अमराई में ।
-0-
ये विनती है

-डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा
1
रुत ये वासंती है
चरणों में हमको
ले लो ये विनती है ।
2
दो बूँद दया बरसे
हम भी  हैं तेरे
फिर कौन भला तरसे ।
3
देरी से आना हो
आकर जाने का
कोई  न बहाना हो  ।
-0-
बोलो कब आओगे

3- डॉ. भावना कुँअर
1
तुम बरसों बाद मिले
मन के तार छिड़े
सारे  ही ज़ख़्म सिले।
2
जीवन की रीत रही
सच्ची प्रीत सदा
इस मन की मीत रही
3
बोलो कब आओगे ?
उखड़ रही साँसें
सूरत दिखलाओगे ?

(अनुपमा त्रिपाठी के स्वर में माहिया सुनने के लिए http://youtu.be/EEhS2HJvzXEपर क्लिक कीजिए ।

3 Comments:

sunita kamboj said...

तुम हाथ बढ़ा देना
करुणाकर !सुन लो
तुम पार लगा देना ।

सुधा जी सभी माहिया बहुत सुंदर

sunita kamboj said...

दो बूँद दया बरसे
हम भी हैं तेरे
फिर कौन भला तरसे ।

ज्योत्स्ना जी सभी माहिया उम्दा ..हार्दिक बधाई

sunita kamboj said...

तुम बरसों बाद मिले
मन के तार छिड़े
सारे ही ज़ख़्म सिले

भावना जी सभी माहिया अति सुन्दर ..हार्दिक बधाई

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